रोजा बस अड्डे के पास एक सराफा दुकान से दोनों को कुल 378500 रुपये के जाली नोट के साथ गिरफ्तार किया था। इसमें एक हजार के 95 नोट जबकि बाकी रकम 500-500 रुपये के नोट में थी। पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया था कि वे बिहार के दरभंगा से जाली नोट लाए हैं और कई राज्यों में खपाते हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 471, 489 ख और 489 ग के तहत कोर्ट में चार्जशीट पेश की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने कोर्ट में पुलिस की कहानी को झूठा बताते हुए कहा कि वे दरभंगा से अमृतसर जाने वाली जननायक एक्सप्रेस से दिल्ली में मजदूरी के लिए जाने के लिए रोजा उतरे थे। रोजा जंक्शन पर ये ट्रेन की जानकारी कर रहे थे तभी पुलिस ने इन्हें पकड़ कर अपनी कहानी बना ली। सरकारी वकील संजय सिंह तोमर द्वारा पेश गवाहों के बयान सुनने और पुलिस द्वारा सप्रमाण प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देेते हुए शुक्रवार को फैसला सुनाया। पकड़े जाने के बाद से दोनों न्यायिक हिरासत में थे। अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि जेल में बिताई गई अवधि को दोनों के दंडादेश में समायोजित और बरामद जाली नोटों को सरकार/रिजर्व बैंक के पक्ष में जब्त किया जाता है। अपील की स्थिति में हाईकोर्ट के निर्देशों के अधीन इन जाली नोटों का विधि अनुसार निस्तारण होगा।
ऐसे पकड़ में आए दोनों जालसाज
शाहजहांपुर। रोजा थाना के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर आरएस यादव अपनी टीम के साथ 20 मार्च 2013 की सुबह गश्ती के बाद थाने पर लौट रहे थे। तभी रोजा बस अड्डे के पास आदर्श नगर कालोनी निवासी सराफा कारोबारी प्रेम गुप्ता मिले। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान पर दो लोग अभी आए थे और चार हजार रुपये मूल्य की एक सोने की अंगूठी खरीदी। उनके द्वारा दिए गए एक हजार के नोट और अन्य छह पांच-पांच सौ वाले नोट देखने में जाली लगे तो दोनों को अंगूठी की साफ सफाई में समय लगने के चलते आधे घंटे बाद बुलाया है। सूचना पर इंस्पेक्टर, एसआई सिद्धनाथ कटियार, कांस्टेबल अतेंद्र प्रताप सिंह, अबरार खां, विनोद कुमार कश्यप, सोनू शर्मा और पंकज कुमार को साथ लेकर प्रेम गुप्ता की दुकान के पास दोनों के इंतजार में छुप गए। सुबह करीब 10 बजे दोनों आरोपी प्रेम गुप्ता की दुकान पर पहुंचे तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से करीब पौने चार लाख रुपये के जाली भारतीय करेंसी मिली। उसी समय इन नोटों की जांच कोआपरेटिव बैंक के कैशियर जगरूप सिंह को बुलाकर कराई गई तो उन्होंने जाली होने की पुष्टि की थी।