पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए गन्ना किसानों ने ट्रेंच विधि से गन्ना उत्पादन की आधुनिक तकनीक सीखी। इन 40 किसानों ने गन्ना शोध परिषद के प्रक्षेत्र में गन्ने के साथ सहफसली खेती करने की जानकारी भी हासिल की।
गन्ना किसान संस्थान के सहायक निदेशक प्रवीण कपिल ने मेरठ, बागपत, बुलंदशहर एवं सहारनपुर के गन्ना किसानों को बताया कि संशोधित ट्रेंच विधि खेती करने से चीनी परता और गन्ना उत्पादन में खासी बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही 60 प्रतिशत पानी की बचत की जा सकती है। कहा कि शरदकालीन गन्ने के साथ आलू, लहसुन, चुकंदर, मूली, गाजर, धनिया, चना, मटर, मसूर आदि की बुवाई की जा सकती है। बसंतकालीन गन्ने के साथ मूंग, उरद, राजमा की खेती की जा सकती है।
गन्ना वैज्ञानिक डॉ. केपी सिंह ने अच्छे गन्ना बीज के महत्व एवं कोर कमेटियों के द्वारा स्वीकृत गन्ना प्रजातियों और जल्द पकने वाली गन्ना प्रजातियों के बारे में बताया। किसानों ने निगोही चीनी मिल और गांव कुदिरना के जयवीर यादव के गन्ना खेतों पर भी भ्रमण किया। इस दौरान निगोही चीनी मिल प्रबंधक रणधीर सिंह, राजेश कुमार, नकलीराम, शिशुपाल वर्मा, एमएस वर्मा आदि मौजूद रहे।