रविवार को दोपहर बाद शहर समेत जिले के ग्रामीण अंचलों में हुई व्यापक वर्षा से धान की रोपाई का शेष काम जल्द पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञ और विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि दूसरे दौर की बारिश हजारों छोटे किसानों के लिए वरदान साबित होगी जो अन्य साधनों से खेत पानी भरने के लिए लागत नहीं लगा सके।
करीब पांच लाख किसानों वाले जिले में अधिकांश कम जोत वाले ऐसे छोटे किसान हैं, जिन्हें रबी सीजन में दूसरों की बोरिंग से सिंचाई के बदले भारी कीमत चुकानी पड़ती है और खरीफ फसलों के लिए मानसून का बेसब्री से इंतजार रहता है। ऐसे में जो किसान पिछले दिनों धान की पौध नहीं लगा पाए, उन्हें बारिश की बेरुखी सता रही थी। इस वर्ष जिले में 2.11 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन अभी तक 30 फीसदी खेत खाली पड़े हैं।
कृषि विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि जिन किसानों के पास सिंचाई के संसाधन नहीं हैं या फिर नहरों से उनके खेत काफी दूर हैं, दूसरे दौर की बारिश का उनका इंतजार अब खत्म हो गया। ऐसे हजारों किसान हैं, जिनके पास दो-ढाई एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं है। इन सभी को बारिश ने रोपाई पूरी करने का मौका दे दिया है।
जुलाई में सामान्य से 50 मिमी ज्यादा हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक जून से 31 जुलाई तक सामान्य से करीब 40 फीसदी बारिश कम हुई है। गन्ना शोध परिषद के मौसम विशेषज्ञ सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार जिले में जून माह में 119.7 मिमी और जुलाई में 300 मिमी सामान्य वर्षा होनी चाहिए। इसके विपरीत जून माह में केवल 54 मिमी और जुलाई में 355 मिमी बारिश रिकार्ड हुई जो कि सामान्य से 50 मिमी अधिक है। उन्होंने बताया कि रविवार को 57 मिमी बारिश होने से धान की रोपाई तेज हो जाएगी।
अब पूरी हो जाएगी धान की रोपाई
जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय के मुताबिक जिले में धान की रोपाई का अधिकांश काम हो चुका है। बारिश के पहले दौर के बाद से अब तक तमाम किसानों ने ट्यूबवेल से खेत भरके धान पौध लगाई जा चुकी है। खाली पड़े खेतों में कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली बाजरा, उड़द, तिल की फसलें बोई जा चुकी है। बमुश्किल 15-20 प्रतिशत रकबा शेष बचा था। दूसरे दौर की बारिश से रोपाई में तेजी आ जाएगी।