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धान की रोपाई में तेजी, मैंथा डूबा

Sun, 12 Jul 2015 11:51 PM IST
शाहजहांपुर।
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 जिले में हुई व्यापक वर्षा ने धान की रोपाई का रास्ता साफ कर दिया है। इस वर्ष 2.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल लेने का लक्ष्य तय है, लेकिन अपर्याप्त बारिश के कारण लघु और मध्यम जोत वाले तमाम छोटे किसान झमाझम बरसात का इंतजार कर रहे थे। रविवार को कमोबेश सभी तहसीलों में धान की रोपाई ने रफ्तार पकड़ ली। हालांकि, कृषि वैज्ञानिक लतावर्गीय सब्जियों और मैंथा की खेती के लिए भारी वर्षा को हानिकारक मान रहे हैं। उन्होंने किसानों को सब्जियों और मैंथा वाले खेतों से पानी निकालने की सलाह दी है।
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कृषि प्रधान जिले में करीब सात लाख किसान हैं, जिनमें बड़ी संख्या कम जोत वाले ऐसे छोटे किसानों की है, जिनके पास सिंचाई के लिए निजी बोरिंग का साधन नहीं है और उनके खेत नहरों से काफी फासले पर हैं। हर साल धान की बुवाई के वक्त यह किसान मानसून की बारिश बेसब्री से इंतजार करते हैं। शनिवार रात से लेकर रविवार को दिन निकलने तक हुई लगातार बारिश से अधिकांश खेत पानी से लबालब हो गए।
किसानों को इसी मौके का इंतजार था। जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय ने बताया कि धान के लिए तय किए गए लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 20 फीसदी रोपाई हो सकी है। उन्होंने कहा कि पानी से भरने के बाद अधिकांश खेत धान की पौध लगाने को तैयार हो चुके हैं। हालांकि, बारिश के कारण जलालाबाद, तिलहर और निगोही ब्लॉक के आठ हजार हेक्टेयर में बोई गई मैंथा की फसल पूरी तरह खराब होने की आशंका पैदा हो गई है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के शस्य विज्ञानी डॉ. केएम सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि मैंथा के खेत से तत्काल पानी निकाल दें और जमीन सूखते ही पौधों को उखाड़कर उनका आसवन कराना शुरू कर दें, क्योंकि देरी होने पर तेल कम मात्रा में निकलेगा और उसकी क्वालिटी भी खराब हो जाएगी। उन्होंने मैंथा को कीट-रोगों से बचाने के लिए कार्बनडाइजेब, मैंकोजेब आदि कीटनाशकों का छिड़काव करने का सुझाव देते हुए कहा कि लौकी, तोरई, करेला, सीताफल, खीरा आदि लतावर्गीय सब्जियों वाले खेतों में भी पानी ठहरना नहीं चाहिए।
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