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Shahjahanpur News: ठंड में सितम... मरीजों को पतले कंबल, तीमारदार भी परेशान

Wed, 01 Jan 2025 12:46 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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शाहजहांपुर। भीषण ठंड में राजकीय मेडिकल कॉलेज में रुकना पड़ जाए तो रजाई घर से लेकर आएं। यहां मरीजों को सर्दी से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अस्पताल और वार्ड की टूटी खिड़कियों से आती सर्द हवा अंदर भी कंपकंपाने पर मजबूर कर रही है। अस्पताल की ओर से मिलने वाले पतले कंबल से मरीजों की ठंड दूर नहीं हो पा रही है।
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330 बेड के मेडिकल कॉलेज के वार्डों में गेट को बंद करने की व्यवस्था नहीं है। सोमवार से पारा गिरने के बाद मंगलवार को पड़ताल की गई तो लोग यहां दिन में भी ठंड से परेशान नजर आए। डॉक्टर और स्टाफ हीटर के सहारे सर्दी से बचाव करते दिखे। मरीजों ने बताया कि भर्ती होने पर उन्हें मात्र एक पतला सा कंबल दिया गया। इससे सर्दी लगनी बंद नहीं हुई तो उन्हें घर से रजाई मंगानी पड़ी।
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती नवजात के तीमारदारों को रुकने के लिए गली में बेड डाले गए हैं। दूसरी मंजिल पर बने केंद्र पर तीमारदाराें को सर्दी में ठंडी हवा से जूझना पड़ रहा है। यहां की खिड़की के शीशे टूटे हुए हैं। हवा से बचाव के लिए तीमारदारों ने खिड़की पर पॉलीथिन बांध दी, लेकिन फिर भी हवा नहीं रुकने से परेशान होते रहे। कुछ वार्ड में खिड़की के या तो शीशे क्षतिग्रस्त हैं या फिर खिड़की के छिद्रों से हवा अंदर आती रहती है।
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महिला अस्पताल के वार्ड व बाल रोग वार्ड में हीटर की सुविधा दी गई है। बच्चों को सर्दी से बचाव के लिए प्रत्येक वार्ड में एक हीटर है। बाकी जगह पर सुरक्षा कारणों से हीटर नहीं लगाने की बात कही गई है।
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रैन बसेरे में घुसे रही सर्द हवा... अलाव भी सीमित
अस्पताल परिसर में अलाव तक के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। रैन बसेरे के पास मात्र एक अलाव लगा है। नए भवन में महिला अस्पताल संचालित होने के बावजूद अलाव नहीं लगाया गया है। नई बिल्डिंग के पास, ट्राॅमा सेंटर, पुलिस चौकी के पास भी अलाव की जरूरत तीमारदार महसूस करते हैं। ऐसे में मरीजों के तीमारदार ठंड में परेशान होते हैं। वहीं, परिसर में बनाए गए एकमात्र रैन बसेरे में सर्द हवा अंदर तक आती हैं। रजाई-गद्दे तो डाले गए हैं लेकिन हवा अंदर आने से तीमारदार वहां रुकने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।


सुरक्षा कारणों से वार्डों में हीटर नहीं जला सकते हैं। मरीजाें को कंबल देते हैं। उन्हें जरूरत पड़ने पर एक से ज्यादा कंबल भी देने का नियम है। अगर कोई आवश्यकता बताता है तो उसे कंबल उपलब्ध कराया जाएगा। खिड़की-शीशे ठीक करा दिए जाएंगे।
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डॉ. नेपाल सिंह, सीएमएस
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