मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए निर्मल गंगा अभियान को जिले में प्रभावी बनाने केलिए नदी के तटवर्ती इलाके में बसे गांवों में अब बंद टैंक वाले शौचालय बनाए जाएंगे। इसके लिए कलान और मिर्जापुर ब्लॉक में गंगा के किनारे बसे छह गांव चुने गए हैं। इन गांवों में केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप बढ़ी हुई लागत पर 2124 मार्डनाइज्ड टॉयलेट बनने प्रस्तावित हैं।
इन गांवों में बनेंगे शौचालय
विकास खंड कलान के गांव एतमादपुर चक, हेतमपुर, जहानाबाद खमरिया और मोहनपुर कलुआ की गंगा से दूरी काफी कम है। इसी तरह मिर्जापुर ब्लॉक के गांव दोषपुर थोक और पैलानी उत्तरी भी गंगा की तलहटी में बसे हैं। इसलिए इन सभी गांवों में बंद टैंक वाले टॉयलेट बनाने का निर्णय किया गया है।
नए शौचालयों के टैंक नहीं बनेंगे जालीदार
अभी तक गांवों में बनने वाले शौचालयों के टैंक की दीवारों में ईंटों की जाली बनाई जाती थी। बरसात के दौरान नदी के तटीय गांवों में बाढ़ आने पर शौचालयों के साथ जालीदार टैंक भी बह जाते थे। ऐसे में लाभार्थियों को दिक्कत के साथ टैंक में जमा गंदगी गंगा में समाकर उसे प्रदूषित करती थी। इसलिए गंगा के तटवर्ती गांवों में नए शौचालयों के टैंक ठीक उसी तरह ठोस दीवार वाले बनाए जाएंगे, जैसे नगरीय क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं।
लागत बढ़ने से निर्माण कार्य में आया ठहराव
व्यक्तिगत स्वच्छता के हिमायती महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर मोदी सरकार ने शौचालय निर्माण की लागत 10900 से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दी है। लागत मद में बढ़ी 1100 रुपये की धनराशि कहां-कैसे खर्च होगी, इस बारे में कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं मिलने से संबंधित अधिकारी असमंजस में हैं। केंद्र और राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि नई निर्माण लागत में उनका और लाभार्थियों का कितना हिस्सा होगा।
शासन से गाइड लाइन मिलने का इंतजार
‘गंगा किनारे के गांवों में बनने वाले शौचालयों के टैंक का ढांचा बदला जाना है, लेकिन अभी शासन से इस बारे में विस्तृत दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। लखनऊ में पिछले दिनों हुई उच्चस्तरीय बैठक में अफसरों ने सिर्फ इतना बताया कि ऐसे गांवों में टैंक की दीवारों से जाली हटाकर उन्हें ठोस रूप दिया जाना है।’
- चंद्रिका प्रसाद, जिला पंचायत राज अधिकारी