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सीमा विवाद में फंसा बाघ का मामला

Thu, 09 Jun 2016 12:15 AM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
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भाघ - फोटो : अमर उजाला
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खुटार क्षेत्र में बाघ के आ जाने से क्षेत्र के लोग परेशान हैं, वहीं वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी बाघ को एक दूसरे की सीमा में होने की बात कहकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों की इस कार्यशैली से क्षेत्र के लोगों में रोष व्याप्त है। 
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गौरतलब है कि 04 जून को बाघ गांव बरबटपुर के गुरदेव सिंह के फार्म पर जा पहुंचा था और उनके कुत्ते को मार दिया था। 05 जून को बाघ ने कठिना नदी के पास एक नीलगाय को अपना शिकार बनाया था। पिछले तीन दिन से बाघ कठिना नदी पर लालगिरी बाबा के स्थान के पास देखा जा रहा है। बाघ देखने के लिए यहां रोजाना सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटती है। लोगों ने कई बार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को मामले से अवगत कराया लेकिन खुटार रेंजर को फोन करने पर वह बाघ के मैलानी रेंज की सीमा में होने की बात कहकर टरका देते है, और मैलानी रेंजर को फोन करने पर वह बाघ को खुटार रेंज में होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। इस पर लोगों ने बाघ को खुद ही खदेड़ने का प्रयास शुरू कर दिए हैं। तमाम लोग रोज सुबह से ही लालगिरि बाबा के स्थान पर एकत्र हो जाते है और अपनी जान की परवाह न करते हुए दिन भर शोर शराबा कर बाघ को जंगल की ओर भगाने का प्रयास करते हैं। बतातें चलें कि नाले में तब्दील हो चुकी कठिना नदी के पूरब मैलानी और पश्चिम खुटार रेंज है। 

1. बाघ मैलानी रेंज की सीमा में है खुटार रेंज का कोई मतलब नही है, अगर खुटार रेंज में आता भी है तो भी मैलानी रेंज ही जाने क्योंकि बाघ उनके जंगल से आया है। -- एसएन यादव रेंजर खुटार 
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2. बाघ की निगरानी की जा रही है। कई जगह कैमरे भी लगाये गए हैं। डब्लूडब्लूएफ की टीम भी लगी है। बाघ ने कुत्ते और नीलगाय का शिकार खुटार रेंज में किया है। मुझे इससे कोई मतलब नहीं है। -- डीएस यादव, रेंजर मैलानी (खीरी)

बाघ के भय से नहीं मिल रहे श्रमिक
खुटार। बाघ के भय से लोगों को खेत में काम करने के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। बाघ के डर से किसान भी खेतों पर नहीं जा रहे हैं, वहीं श्रमिकों ने बाघ के रहने तक खेतों में काम करने से साफ इंकार कर दिया है। गांव बरबटपुर, कोचर फार्म, निहालपुर, रायपुर, सुआबोझ के किसानों ने बताया कि जब से बाघ आया है नौकर काम करने से मना कर रहे हैं। बाघ से जान का खतरा होने के कारण कुछ मजदूरों ने मजदूरी बढ़ाकर चार से पांच सौ रुपए प्रतिदिन कर दी है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि उनकी गन्ने की फसल सूख रही है, लेकिन बाघ के भय से सिंचाई नहीं हो पा रही है। कुछ किसान खुद ही खेत पर सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन वह बाघ के भय से थोड़ी थोड़ी देर पर पटाखे आदि चलाते रहते हैं।
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