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खुटार इलाके में बाघ की दहशत.. वन विभाग बेपरवाह

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पुवायां। खुटार रेंज के कई गांवों में बाघ देखे जाने और वनकर्मियों की लापरवाही के कारण लोग लखीमपुर जैसी घटना के प्रति आशंकित हैं। लोगों को आशंका है कि बाघ खुटार क्षेत्र में भी हमला कर लोगों की जान ले सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ के देखे जाने पर वन विभाग को सूचना देने पर लापरवाही बरती जा रही हैै। बाघ के न पकड़े जाने से वह दहशत में जी रहे हैं।
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लखीमपुर के गांव चमरनपुरवा, गौढ़ी चकदाह गांव में सोमवार रात बाघ के हमले में पुतान के 12 वर्षीय पुत्र बृजेश की मौत हो गई है। खुटार रेंज के अंतर्गत गांव पुनौती, भरकलीगंज, रजमना, बरवटपुर, हिमंचलपुर में बाघ देखा जा रहा है। एक महीने से बाघ के तमाम जगहों पर देखे जाने से किसान बेहद परेशान हैं, लेकिन वनकर्मी जागरूक करने की बात कह कर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। किसानों से खेतों में समूह में जाकर काम करने को कहा जा रहा है, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।
खुटार रेंज की सिहुरा वीट के लौहंगापुर जंगल, लौहंगापुर, पुनौती गांवों के आसपास 24 अगस्त को बाघ देखा गया था। वन विभाग की ओर से यहां टाइगर बाहुल्य का बोर्ड और कैमरे लगवाए गए थे, लेकिन बाघ का पता नहीं चल सका था। 28 अगस्त को गांव भरकलीगंज निवासी बाबू शाह और उनके नौ वर्षीय पुत्र शहजाद पर हमला कर घायल कर दिया था। कुछ लोग भालू और कुछ लोग बाघ के हमला करने की बात कह रहे थे। बाद में वनकर्मियों ने भालू के हमला करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था। इसके बाद आठ सितंबर को गांव रजमना, दस सितंबर को सिंहपुर और 11 सितंबर को खजुरिया के पास बाघ देखा गया लेकिन वनकर्मी सूचनाओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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वर्ष 2010 में ‘शाहजहां’ ने फैलाई थी दहशत
पुवायां। वर्ष 2010 में खुटार रेंज के खुटार और बंडा क्षेत्र में बाघ ‘शाहजहां’ ने खासी दहशत फैलाई थी। शाहजहां को पकड़े जाने तक उसने पांच लोगों को मार डाला था। इसके बाद वर्ष 2017-18 में बंडा क्षेत्र में बाघ ने कई लोगों पर हमला कर गंभीर घायल किया था।
खुटार रेंज के जंगल पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दुधवा नेशनल पार्क आदि से जुड़े हुए हैं। इस कारण खुटार के जंगल और आसपास के गांवों में अक्सर बाघ, तेंदुआ, गुलदार आदि देखे जाते रहते हैं। मई 2010 से अक्तूबर 2010 तक पीलीभीत, लखीमपुर, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, पांच जिलों में में आतंक फैलाने वाले आदमखोर बाघ ने बंडा और खुटार में पांच लोगों को मार डाला था। बाघ पीलीभीत के दियोरिया रेंज के जंगल से निकला था। 14 अक्तूबर 2010 की शाम भारी भीड़ के बीच शाहजहांपुर के डीएफओ पीपी सिंह ने बाघ को फर्रुखाबाद के हीरानगला गांव में ट्रैंक्युलाइज किया था। पीपी सिंह ने आदमखोर बाघ का शाहजहांपुर जिले के नाम से नामकरण करते हुए उसका नाम शाहजहां रखा था। शाहजहां आज भी कानपुर प्राणी उद्यान में है। इसके अलावा 25 सितंबर 2018 की रात बाघ ने खुटार रेंज के नवदिया बंकी जंगल में पीलीभीत के थाना पूरनपुर के गांव सिमराया निवासी 24 वर्षीय लक्ष्मण प्रसाद और 19 दिसंबर 2018 बंडा के गांव बरी निवासी उदयराज को खुटार रेंज की नवदिया बंकी बीट में मार डाला। 19 जनवरी 2019 को गांव नवदिया बंकी पश्चिमी के शिवकुमार पर शौच करते समय बाघ ने हमला कर दिया था, जिसमें शिवकुमार की जान चली गई थी।
तेंदुआ और गुलदार मिले थे मृत
पुवायां। खुटार रेंज बिल्ली प्रजाति की बाघ, तेंदुआ, गुलदार के लिए काल भी बनता रहा है। तीन फरवरी 2014 को गांव छापाबोझी के पास खुटार रेंज के जंगल के पास एक तेंदुआ मृत पड़ा मिला था। इसके बाद 18 जनवरी 2016 को गांव नरौठा हंसराम और नरौठा देवीदास के बीच से हाईवे को जोड़ने वाले मार्ग पर गन्ने केे खेत में एक तेंदुआ मृत पाया गया था। चार अप्रैल 2018 को खुटार के ही गांव रजमना के पास गुलदार देखा गया था। गुलदार बीमार लग रहा था, लेकिन वनकर्मियों के लापरवाही बरतने से गुलदार की मौत हो गई थी।
जहां भी गांव के लोग सूचना देते हैं, वहां वनकर्मी भेजकर जांच कराई जाती है। बरवटपुर में गुलदार के पगमार्क ट्रेस हुए थे। बरवटपुर जंगल के किनारे हैं। इस कारण गुलदार फार्म पर आ गया होगा।
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- डीएस यादव रेंजर, खुटार
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