शाहजहांपुर। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ कुमार वागव ने हत्या के मुकदमे में तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों को 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी दी है। शासकीय अधिवक्ता शशिमोहन सिंह, शिवकुमार सिंह और अमित कुमार वाजपेयी ने बताया कि खुदागंज के निवासी फूलचंद्र ने 26 नवंबर 1996 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
फूलचंद्र ने बताया कि 24 नवंबर 1996 को उसके पिता हीरालाल और नरेश ने शराब पी। किसी बात पर दोनों में बहस हो गई थी। उसके पिता खेत पर गए हुए थे। नरेश ने उन्हें लाठी से पीटकर घायल कर दिया था। बाद में इलाज के दौरान हीरालाल की मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद पुलिस ने मामला गैर इरादतन हत्या की धारा में बदल दिया।
पुलिस ने विवेचना के बाद भगवान दास, रामनिवास का नाम शामिल करते हुए हत्या के मामले में आरोप पत्र अदालत में भेजा था। मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकीलों के तर्कों से सहमत होते हुए अदालत ने भगवानदास, नरेश और रामनिवास को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया।
अभियुक्तों ने दर्ज कराया था क्रास केस
इस मामले में कोर्ट में मुकदमे के वादी फूलचंद्र के ऊपर आरोपियों ने क्रास केस दर्ज कराया था। यह परिवाद के रूप में वर्ष 2021 में रजिस्टर किया गया। मुकदमे में अभी आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है।
बेटे ने नहीं मानी हार, 26 साल तक लड़ता रहा केस
मामूली बात पर होरीलाल को आरोपियों ने लाठी से पीटकर घायल कर दिया। उसके बाद उनकी मौत हो गई। बेटे फूलचंद्र ने आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का फैसला लिया। खेतीबाड़ी करने वाले फूलचंद्र ने 26 साल तक केस की पैरवी की। विपरीत हालत में भी उसने हार नहीं मानी और पूरी मजबूती के साथ केस लड़कर पिता के हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई।