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Shahjahanpur News: गंगा में पानी बढ़ने से तीन दर्जन गांव बने टापू, संकट में ग्रामीण

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जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाइवे पर बैलगाड़ी से बाइकें ले जाते ग्रामीण। संवाद
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मिर्जापुर/कलान। पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश और बैराजों से निकल रहे पानी के कारण गंगा नदी में पानी बुधवार को बढ़ गया। इस कारण तटवर्ती इलाकों में बसे करीब तीन दर्जन गांव चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गए हैं। भरतपुर-बसोला संपर्क मार्ग कटने के बाद जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे सहित कई संपर्क मार्ग और आसपास के खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं।
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शमशाबाद स्टेट हाईवे पर तहसील के चौरा गांव से लेकर फर्रुखाबाद के बसोला गांव तक पांच किमी हिस्से में बीते 24 घंटे के दौरान पानी बढ़कर तीन फुट हो गया है। कई संपर्क मार्गों पर भी तेजी से पानी बह रहा है। बावजूद इसके ग्रामीण बैलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से निकल रहे हैं। हाईवे के इसी हिस्से में पिछले दिनों एक दंपती की बाइक समेत बैलगाड़ी बह चुकी है। इन हादसों में महिला और उसकी दो बेटियों समेत एक अन्य ग्रामीण की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी हाईवे पर आवाजाही रोकने को कोई प्रयास नहीं किए गए।
कई गांवों के संपर्क मार्ग पानी के तेज बहाव से कटने की आशंका बढ़ गई है। कई संपर्क मार्गों की मिट्टी कट रही है, लेकिन ग्रामीण जरूरी चीजो की खरीददारी को मजबूरन पानी में घुसकर बाहर निकल रहे हैं। हाईवे से लेकर ढाई गांव तक गंगा के किनारे बसे गांवों के खेत पानी में डूब गए हैं। इस कारण सैकड़ों हेक्टेयर में बोई गईं धान, मक्का, तिल, ज्वार, बाजरा, उड़द, शकरकंद, मूंगफली आदि फसलें पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि एक माह में तीसरी बार गंगा में पानी बढ़ रहा है। इसलिए तमाम फसलें पहले ही खराब हो चुकी हैं। शेष बची फसलें फिर पानी में डूब जाने से उन्हें बचाना अब संभव नहीं रहा। इस्लामनगर और आजादनगर में कई ग्रामीणों के गांव के बाहरी हिस्सों में बने घरों के आगे तक पानी भर जाने से वहां का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीण खाने-पीने की व्यवस्था और पशुओं के लिए चारा नहीं मिलने से बहुत परेशान हैं।


इन सभी गांवों को राहत सहायता की दरकार
कलान। शमशाबाद स्टेट हाईवे के दोनों ओर बसे तारापुर, मोहम्मदपुर, गुलरिया, इस्माइलपुर, बीघापुर, पकड़िया नगला, धोबिया नगला, भरतपुर, मोती नगला, गुटेटी उत्तर, एत्मादपुर चक, पिपरिया नगला, मुस्तफा नगर, मुड़िया खेड़ा भंवरा नगला, बांसखेड़ा, बसोला और मिर्जापुर क्षेत्र में ढाई, आजादनगर, इस्लामनगर, मस्जिद नगला, पैलानी उत्तरी, कमथरी, चितार, कटेला नगला, लोहार नगला आदि गांवों के चारों ओर पानी भर जाने से ग्रामीणों को प्रशासन से राहत सहायता की दरकार है, लेकिन बाढ़ चौकियाें के कर्मचारी अभी इन गांवों में नहीं पहुंचे हैं। वहां नाव के साथ खाद्य रसद और खाने के पैकेट वितरित कराने की जरूरत है।



नारायणनगर में भूमि कटान कर रही रामगंगा
परौर। रामगंगा में आई बाढ़ का पानी बुधवार को सुबह नारायणनगर पश्चिमी में वहां पहुंच गया, जहां दो साल पहले वायर क्रेट में पत्थर डालकर ठोकरें बनाई गईं थीं। पानी के तेज बहाव से ठोकरें बह जाने के बाद अब वहां की उपजाऊ जमीनें कटने लगी हैं। इससे वह किसान बेहद मायूस हैं, जिन्होंने एक माह पहले खराब हुई फसलों की जगह दोबारा बोआई की थी। मोहनपुर से लेकर बिचपुरी और नारायणनगर तक तमाम खेत डूबे होने से उनमें खड़ी फसलें बरबाद होना तय है। मैंथा समेत तिल, बाजरा, मक्का आदि फसलों को व्यापक क्षति होने का अनुमान है। संवाद

बांधों और बैराजों से पानी की भारी मात्रा में निकासी होने से गंगा के जलस्तर में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अभी बाढ़ का असर गत वर्ष की तुलना में कम है। प्रभावित गांवों की स्थिति जानने के लिए वहां के ग्राम प्रधान संपर्क में हैं। आवश्यकता होने पर राहत सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। -अभिषेक प्रताप सिंह, एसडीएम, कलान

जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाइवे पर बैलगाड़ी से बाइकें ले जाते ग्रामीण। संवाद

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