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फसल इनकी नष्ट हुई मुआवजा दूसरों को

Wed, 15 Apr 2015 12:08 AM IST
पुवायां।
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बारिश और आंधी में फसल खराब हो जाने पर सरकार किसानों को मुआवजा के चेक दे रही है, लेकिन तमाम ऐसे किसान भी हैं जिनकी फसल तो नष्ट हुई है, लेकिन मुआवजा दूसरों की जेब में जाएगा। जिन किसानों ने दूसरों की जमीन ठेके (पटके)या बटाई पर ले रखी है वह जमीन मालिकों की चिरौरी करते घूम रहे हैं कि फसल नष्ट होने पर मिलने वाली मुआवजे की रकम उन्हें दे दी जाए। कुछ जमीन स्वामियों ने किसानों का भरोसा दिया है कि मुआवजा राशि दे देंगे, लेकिन तमाम मामलों में ऐसा नहीं है।
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तीन एकड़ फसल हुई नष्ट
पुवायां। गांव जनकापुर निवासी रामभरोसे मजदूरी कर अपनी और एक पुत्र, पुत्री की गुजर करते है। बच्चे भी मेहनती हैं सो गांव के ही लोगों की तीन एकड़ जमीन 18 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से ठेके पर लेकर गेहूं बोया था। फसल अच्छी थी, जिससे अच्छे पैसे मिलने की उम्मीद थी। बारिश शुरू हुई और तेज हवा चली तो गेहूं खेतों में ही चौपट हो गया। कोठरी की कच्ची छत भी गिर गई। जमीन के ठेके का रुपया एडवांस दिया था वह भी डूब गया। भारी नुकसान से रामभरोसे की रात की नींद और दिन का चैन उड़ गया है। जमीन दूसरों की होने के कारण मुआवजा मिलने की उम्मीद भी नहीं है।

पुवायां। रामआसरे राज मिस्त्री हैं। उनके भाई गांव भरतापुर में रहते हैं। वह गांव इमलिया में रहते हैं। एक कोठरी है, जिसमें गुजर बसर होती है। राज मिस्त्री का काम करने के साथ ही इस बार खेती करने की सोची। दो एकड़ खेत ठेके पर लिया, लेकिन सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने वाली कहावत चरितार्थ हो गई। बारिश से सारी फसल खराब हो गई। अब परिवार की रोजी रोटी के साथ ही जमीन का ठेका देने की चिंता खाए जा रही है।
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पुवायां। गांव भरतापुर के ही छोटेलाल के चार बच्चे हैं। बड़ा पुत्र 14 वर्ष का है। भूमिहीन होने के कारण कच्ची गृहस्थी पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर है। कुछ पैसे जोड़कर रखे थे, उनसे खेती कर काम आगे बढ़ाने की सोची। गांव के ही एक व्यक्ति से चार बीघा खेत ठेके पर लेकर गेहूं बोया था। खूब मेहनत भी की। छोटेलाल को उम्मीद थी कि 12 से 14 क्विंटल गेहूं मिल जाएगा, जिससे पूरे साल अनाज नहीं खरीदना पड़ेगा। बारिश ने सारे सपने चकनाचूर कर दिए। ठेके के रुपये भी गए और गेहूं की हालत यह है कि कटाई, गहाई तक का खर्च निकालना मुश्किल है। मुआवजा भी हाथ नहीं लगेगा क्योंकि जमीन उनकी अपनी है नहीं।

खुटार। गांव रसवां कलां निवासी सुरेश कुमार के पास अपनी जमीन नहीं है। उन्होंने खुटार के रामलड़ैते की आठ बीघा जमीन ठेके पर ली थी। जिसमें बरसात में पानी भरने के कारण धान नहीं लगा पाए और उसके बाद मसूर बोई तो वह भी बारिश में चौपट हो गई। इसके अलावा खुटार के ही रामलड़ैते, श्रीकृष्ण, रामपाल, रामकेशन की आठ बीघा जमीन पटके पर है। जिसका 12 क्विंटल गेहूं पटके का देना है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि ठेके पर जमीन लेने वालों को लाभ हो सके।

खुटार। गांव रसवां कलां के ही रामसनेही के पास मात्र तीन बीघा अपनी जमीन है। इसके अलावा उन्होंने 14 एकड जमीन को ठेके और पटके पर ले रखा है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में मसूर खड़ी थी, जिसमें बारिश होने के बाद मात्र एक कुंतल मसूर निकली। बारिश में फसल खराब न होती तो छह से सात कुंतल मसूर निकलती। इसके अलावा अन्य जमीन पर गेहूं खड़ा है। नुकसान के बारे में बोले कि बारिश ने तो कहीं का नहीं रखा है। इस बार पटके का गल्ला पूरा करने के लिए मुसीबत होगी तो लागत की बात ही क्या। शासन मुआवजे में हमें भी शामिल करता जिससे कम से कम कुछ राहत मिल जाती।

नंदराम ने उठाई है इन किसानों के हक में आवाज
शाहजहांपुर। किसानों को मुआवजा देने के लिए यूं तो सभी प्रमुख विरोधी दल धरना-प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बना रहे हैं लेकिन जलालनगर के नंदराम अकेले ही कलेक्ट्रेट में उन लोगों के लिए धरने पर बैठे हैं जो बर्बाद तो हुए हैं लेकिन शासन-प्रशासन की नजर में मुआवजा पाने के हकदार नहीं हैं। नंदराम के मुताबिक, जिले में तकरीबन 80 फीसदी किसान बटाई या पटके पर जमीन लेकर खेती करते हैं। उनके पास अपनी जमीन नहीं है। आसमान से बरसी आफत ने इन किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। उन्हें जमीन मालिकों को तो निश्चित रकम देनी ही है लेकिन उनके हाथ मुआवजा भी नहीं लगना है। शासकीय व्यवस्था में मुआवजा जमीन मालिक को ही मिलना है। नंदराम इन्हीं किसानों के हक में आवाज उठाने के लिए कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे हैं। उनकी मुख्यमंत्री से मांग है कि बटाई या पटके पर खेती करने वाले किसानों को भी मुआवजा दिया जाए।

गेहूं को औने-पौने दामों में
बेचने को मजबूर हैं किसान
खुदागंज। कस्बा एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न क्रय एजेंसियों के गेहूं खरीद केंद्र कागजों में भले ही खुल गए हों, लेकिन धरातल पर कोई केंद्र नहीं खुला है। इस कारण किसान अपने गेहूं की फसल को बिचौलियों के हाथ औने पौने दामों पर बेच रहे हैं। क्षेत्र में यूपी स्टेट एग्रो, एफसीआई, आरएफसी आदि क्रय एजेंसियों के कागजों में एक दर्जन से अधिक गेहूं खरीद केन्द्र खोले जा चुके हैं, लेकिन मौके पर एक भी क्रय केन्द्र कार्य नहीं कर रहा है। वहीं प्रशासनिक अमला किसानों की इस समस्या के ओर आंख मूदे हुए हैं। हालांकि खुदागंज नगर, दतेली कोठा खेतल, अकबरपुर, कमलापुर, खिरिया, मझिला, देवरास आदि गांवों में गेहूं क्रय केंद्र कागजों में खुलना दर्शाया गया है।

गेहूं क्रय केंद्रों का शीघ्र ही औचक निरीक्षण करूंगा। किसानों को उनकी फसल सरकारी क्रय केन्द्रों पर तुलवाई जाएगी, जो केंद्र प्रभारी अनियमितता और लापरवाही बरतेंगे उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी।
- पदम सिंह, एसडीएम तिलहर

मृतक बनवारी के घर
पहुंचे तहसीलदार
खेड़ा बझेड़ा। क्षेत्र के गांव बझेड़ा भगवानपुर में बनवारी की मौत के बाद सोमवार दोपहर एक बजे तहसीलदार लालता प्रसाद तिवारी पीड़ित के घर पर पहुंचे जांच पड़ताल कर जल्द ही फसल का मुआवजा देने की बात की। बनवारी की 50 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ था। बटाईदारों और पटके पर रखी जमीन के मामले में बताया कि मुआवजा खेत मालिक को ही मिलेगा। मुआवजे में मिलने वाली रकम में बताया कि 22 हजार पांच सौ रुपये प्रति हेक्टेयर 45 हजार से ज्यादा नहीं और दो हेक्टेयर तक ही मुआवजा मिलेगा। जमीन जितनी भी हो यदि किसी किसान का खेत दो डिस्मिल भी है और नुकसान हुआ है तो उसे 17 सौ पचास रुपये दिये जाएंगेे। चेक वितरित न करने पर उन्होंने बताया कि बैंकों में चेक नहीं है। हम सब प्रयास में है कि जल्द ही किसानों को उनका हक मिल जाए।

1805 किसानों को बांटी
1.11 करोड़ की धनराशि
शाहजहांपुर। फसली नुकसान से प्रभावित 1805 किसानों को प्रशासन की ओर से सोमवार को एक करोड़ 11 लाख 46 हजार 275 रुपये की सहायता राशि वितरित की गई। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) पीके श्रीवास्तव ने बताया कि सदर तहसील के अंतर्गत 712 प्रभावित किसानों को 18.09 लाख रुपये, तिलहर क्षेत्र के 231 किसानों को 8.69 लाख रुपये, पुवायां में 586 किसानों को 75.35 लाख रुपये और जलालाबाद तहसील में 276 किसानों को 9.32 लाख रुपये सहायता राशि के चेक जन प्रतिनिधियों केमाध्यम से वितरित किए गए।
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