तीन दिन से घायल पड़े हिरन ने इलाज के अभाव में आखिर तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। वन विभाग विलुप्त होते इस प्रजाति के हिरन के प्रति लापरवाह बना रहा और उसकी नींद हिरन के मरने के बाद टूटी। इस हिरन का बिलंदापुर में कुछ शिकारियों ने ने शिकार करना चाहा था लेकिन वह घायल होने के बाद बिलंदापुर के खेतों में आ गया था। 23 मार्च की सुबह कुछ शिकारियों ने शिकार के लिए हिरन पर हमला किया था। घायल हिरन ने रोजा थाना क्षेत्र के बिलंदापुर गांव की तरफ आ गया। प्रधान ओमदेव ने बताया कि कई ग्रामीणों ने हिरन को शिकारियों के हमले से बचाया और वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। शिकारियों के हमले से हिरन बुरी तरह घायल हो गया। उसके शरीर से खून का बह रहा था। सूचना देने के बावजूद वन विभाग के किसी भी अधिकारी ने उसके इलाज के प्रति दिलचस्पी नहीं दिखाई। ग्रामीणों ने घायल हिरन का देशी इलाज किया और गांव के प्राथमिक स्कूल के एक कमरे में रखा। तीन दिन तक हिरन जिंदगी की जंग लड़ता रहा लेकिन वन विभाग आंखों पर पट्टी बांधे पड़ा रहा। किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली। घायल हिरन के इलाज करने और खानपान देने की कोशिश भी नहीं की गई। शनिवार सुबह घायल हिरन ने स्कूल के बंद कमरे में दम तोड़ दिया। हिरन की मरने की सूचना पर वनरक्षक केपी सिंह सहित कई कर्मी मौके पर गए और हिरन के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। उसकी मौत अधिक रक्तस्राव से होनी बताई जा रही है।
हिरन के घायल होने अथवा उसकी मौत होने की सूचना हमें नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर मामला है। जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।
- एनपी सिंह, डीएफओ
तीन दिन पहले शिकारियों के हमले से घायल गांव की तरफ आ गया था। कई बार फोन कर वन विभाग को सूचना दी गई लेकिन मौके पर आने की जहमत किसी ने नही उठाई। शनिवार को हिरन की मौत हो गई।
ओमदेव, ग्राम प्रधान
सूचना मिलने पर हमने अपने कर्मियों को मौके पर भेजकर इलाज की व्यवस्था कराई थी। होली के कारण इलाज का इंतजाम मुश्किल से हो सका था। हिरन का पोस्टमार्टम कराया गया है। घटना से डीएफओ को अवगत कराया जा रहा है।
- आरपी सिंह, रेंजर