तिलहर। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ी संस्था बज्म-ए-अरबाब-ए-सुखन की ओर से सोमवार रात मोहल्ला हिन्दू पट्टी में आईपीएस शिव मुरारी सहाय के आवास पर महफिल-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। इस मौके पर शायरों ने समसामयिक कलाम और गजलें पेश कर वाहवाही लूटी।
शकील तिलहरी की अध्यक्षता और फहीम बिस्मिल के संचालन में हुए मुशायरे में हसीब चमन ने कहा, उसको मुजरिम कभी दुनिया ने पुकारा भी नहीं, जिसने जीने न दिया जान से मारा भी नहीं। प्रोफेसर मंसूर सिद्दिकी ने फरमाया-जाने क्यूं हमने जलाए हैं उमीदों के चराग, उस सितमगर की तरफ से तो इशारा भी नहीं। गुलिस्तां खान ने कहा-हम उन इमारतों में सनद छोड़ आए हैं, जिनसे हमारे नाम की तख्ती चली गई। इशरत सग़ीर ने बदलते वक्त पर तंज कसते हुए कहा-यहां तो द्रोपदी ने चीर ख़ुद कम कर दिए हैं, ये कलयुग है यक़ीनन कृष्ण का द्वापर नहीं है।
इसी कड़ी में शकील तिलहरी, फहीम बिस्मिल, मुनीब अहमद शाहजहांपुरी, रईस तिलहरी, फरीद तिलहरी, वहीद तिलहरी, फैजान तिलहरी, रहमत तिलहरी आदि शायरों ने भी कलाम पेश किए। आईपीएस शिव मुरारी सहाय ने कहा ऐसी महफिलें हमारी तहजीब और संस्कृति को जीवित रखने में अहम किरदार निभाती हैं। कार्यक्रम में सौरभ सहाय, महबूब इदरीसी, मसूद हुसैन, लाडले मियां, ब्रजेंद्र प्रजापति आदि मौजूद रहे। अंत में संयोजक बशीरुद्दीन व आमिर मियां ने सभी का शुक्रिया अदा किया।