शाहजहांपुर। प्रसव के बाद निगोही क्षेत्र के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की हालत बिगड़ गई। आनन-फानन उसे स्टाफ ने रेफर कर दिया, लेकिन शाहजहांपुर में अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। महिला के घर में बुधवार को शादी थी, लेकिन शादी की खुशियां मातम में बदल गईं।
महिला को उसके परिजन मंगलवार को सुबह निगोही सीएचसी पर लेकर पहुंचे थे। वहां सामान्य प्रसव से पुत्र का जन्म हुआ। बाद में महिला की हालत खराब हो गई। उसे स्टाफ ने राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। इस बीच तीमारदारों से कस्बे में संचालित एक निजी अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी ने संपर्क किया। बेहतर इलाज की बात कहकर मरीज को अपने अस्पताल में भर्ती करा लिया। महिला के परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल के डॉक्टर ने लगभग सात हजार रुपये भी जमा करा लिए और शाम तक उसका इलाज करते रहे, लेकिन मरीज की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। तकलीफ बढ़ने पर डॉक्टर ने शाहजहांपुर ले जाने की सलाह दे दी। महिला को उसके घरवाले शाहजहांपुर लेकर आए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही महिला की सांसें थम गईं।
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15 दिन के अंतराल में हो चुकीं चार मौतें
-झोलाछापों और निजी अस्पतालों के चंगुल में फंसकर पिछले 15 दिनों में यह चौथी मौत है। हालांकि, एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने पिछले दिनों ऐसे ही एक मामले में निगोही जाकर कस्बे के एक अस्पताल और ईसापुर गांव में झोलाछाप की दुकान को सील कर दिया था, लेकिन अन्य अस्पतालों पर कोई कार्रवाई नहीं की। निगोही क्षेत्र के गांवों से लेकर कस्बे तक झोलाछापों और अवैध अस्पतालों की भरमार है।
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सीएचसी पर नियुक्त नहीं कोई महिला डॉक्टर
-सीएचसी पर इस समय कोई भी महिला डॉक्टर नहीं है। संविदा पर एक महिला डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन वह रोजाना शाम को अपने घर चली जाती हैं। देर शाम अथवा रात में आने वाली गर्भवतियों का प्रसव स्टाफ नर्सों के जिम्मे ही रहता है। खास यह है कि मृतका के परिजनों ने निजी अस्पताल पर कोई कार्रवाई कराए बगैर अंतिम संस्कार कर दिया। सीएचसी के प्रभारी डॉ. नितिन चौधरी के अनुसार, महिला मरीज की मौत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है।