स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र व राज्य सरकार के अंशदान से गांवों में निर्मित कराए जा रहे शौचालयों के निर्माण में ग्राम प्रधानों की मनमानी हावी हो चली है। ददरौल ब्लॉक की ग्राम पंचायत सफ्त्यारा के ग्रामीणों ने बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों से इसी आशय की शिकायत करके शौचालयों के लिए स्वीकृत बजट की धनराशि सीधे लाभार्थ्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराने की गुहार की।
शौचालयों के निर्माण के लिए राज्य सरकार केंद्रीय अंशदान मिलाकर प्रति लाभार्थी 12 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत करती है। लोहिया समग्र ग्राम श्रेणी में चयनित सफ्त्यारा गांव में जिन लाभार्थियों को शौचालय स्वीकृत हुए, उन्हें वहां के ग्राम प्रधान ने सारी सामग्री अपने स्तर से मुहैया कराने का भरोसा दिया। साथ ही टैंक के लिए गड्ढा अपने स्तर से खुदवाने की सीख देकर चलता कर दिया।
लाभार्थियों ने हिसाब जोड़ने पर पाया कि ग्राम प्रधान के स्तर से केवल 8500 रुपये मूल्य की निर्माण सामग्री दी जा रही है। इस नाइंसाफी के खिलाफ वहां के ग्रामीण मुख्यालय पर आकर सिटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह से मिले और उन्हें डीएम के नाम ज्ञापन देकर लाभार्थियों को कमीशन खोरी से बचाने के लिए स्वीकृत धनराशि उनके खातों में भिजवाने की गुहार की।