शाहजहांपुर। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा प्रशासन नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। कई सामुदायिक शौचालय बंद पड़े हैं। अधिसंख्य शौचालयों में गंदगी के कारण इसका इस्तेमाल करने से लोग हिचकते हैं। शहर के शौचालयों के तो दरवाजे तक टूटे पड़े हैं।
नगर निगम क्षेत्र में 37 शौचालय हैं। इनमें महिलाओं के लिए छह पिंक शौचालय है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक इनकी व्यवस्था के लिए 35 सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। इनका भुगतान नगर निगम करता है। बेहतर रखरखाव और सफाई व्यवस्था के लिए दो कर्मियों की तैनाती अलग से की गई है, जो लगातार इन शौचालयों की निगरानी करते हैं। इतनी सब व्यवस्था के बावजूद तमाम शौचालय गंदगी से जूझ रहे हैं।
खिरनीबाग स्थित बीएसए कार्यालय के पास बने शौचालय का फर्श टूटा हुआ है। गंदगी इतनी है कि इसमें लोग जाने से कतराते हैं। निशात रोड पर बने सार्वजनिक शौचालय के दरवाजे टूटे हुए हैं। शहर में अधिकतर शौचालयों में गंदगी फैली हुई है। कहीं भी कर्मचारी तैनात नहीं मिले। पिंक शौचालय पर भी कर्मचारी दिखाई नहीं दिए।
सार्वजनिक शौचालयों की देखदेख के लिए कर्मचारी लगाए गए हैं। जहां भी गंदगी और अनियमितताएं हैं, वहां व्यवस्था ठीक कराई जाएगी। शौचालयों की निगरानी संबंधित अधिकारी से कराई जाएगी।
- डॉ. बिपिन कुमार मिश्र, नगर आयुक्त
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जनपद में शौचालयों की यह है स्थिति
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2014-15 से अब तक कुल 453183 व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का कार्य पूर्ण कराकर लाभार्थियों को लाभ दिया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में जनपद को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। वर्तमान में लाभार्थी शौचालय के निर्माण के लिए भारत सरकार की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं। ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसका सत्यापन करते हैं। पात्र होने पर लाभार्थी को 12000 हजार रुपये दो किस्तों में उपलब्ध कराए जाते हैं। 1061 ग्राम पंचायतों में तीन से चार लाख रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इनकी देखरेख का जिम्मा स्वयं सहायता समूहों को दिया गया है।
जैतीपुर : सामुदायिक शौचालय में पाथ रहे कंडे
जैतीपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था जिसमें करीब पांच लाख रुपये खर्च आया था। हर महीने गांव के एक स्वयं सहायता समूह को छह हजार रुपये मानदेय और तीन हजार रुपये सामग्री खरीदने के लिए दिए जा रहे हैं। बावजूद इसके जैतीपुर ब्लाॅक गेट के पास बने सामुदायिक शौचालय में इतनी गंदगी है कि लोग अंदर घुस ही नहीं पाते। बझेड़ा भगवानपुर में शौचालय के ऊपर रखी पानी की टंकी गायब है। अंदर भयंकर गंदगी है। ग्रामीण इसके बाहर उपले पाथते हैं। नौगवां गोविंदपुर में शौचालय पर वर्षों से ताला लटका हुआ है। इसी तरह क्षेत्र के गांव गौहावर, खेड़ारठ, शिकारपुर में सामुदायिक शौचालय पूरी तरह से बदहाल हैं। बीडीओ मनीष दत्त ने बताया कि शौचालयों की स्थिति दिखवाई जाएगी। अगर कहीं कमी मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। संवाद
बंडी : शौचालयों में गंदगी, पड़े ताले
बंडा। ग्राम पंचायत बंडी में सामुदायिक शौचालय में गंदगी है। पशुओं ने अपना बसेरा बना लिया है। गांव इंदलपुर में सामुदायिक शौचालय पर ताला लटका रहता है। बीडीओ विजयकांत मिश्रा ने बताया कि सभी शौचालयों की जांच कराई जाएगी। यदि गंदगी है या ताला पड़ा हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी। संवाद
तिलहर : टैंक खराब होने से बंद पड़ा शौचालय
तिलहर। तहसील रोड और ब्लॉक रोड पर बनाए गए दोनों सामुदायिक शौचालय लोगों के इस्तेमाल में नहीं आ रहे हैं। तहसील रोड स्थित पिंक शौचालय को तीन लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। टैंक खराब होने से अब तक यहां ताला पड़ा हुआ है। अधिशासी अधिकारी सत्येंद्र प्रकाश ने बताया कि तहसील रोड स्थित सामुदायिक शौचालय के टैंक में तकनीकी समस्या है। इसे ठीक कराकर शौचालय जल्द सुचारु करा दिया जाएगा। संवाद
बंडा के गांव बंडी में सामुदायिक शौचालय में पड़ा ताला। संवाद- फोटो : बंद आंगनबाड़ी केंद्र हड़हवा के बाहर प्रदर्शन करती महिलाएं।
बंडा के गांव बंडी में सामुदायिक शौचालय में पड़ा ताला। संवाद- फोटो : बंद आंगनबाड़ी केंद्र हड़हवा के बाहर प्रदर्शन करती महिलाएं।
बंडा के गांव बंडी में सामुदायिक शौचालय में पड़ा ताला। संवाद- फोटो : बंद आंगनबाड़ी केंद्र हड़हवा के बाहर प्रदर्शन करती महिलाएं।
बंडा के गांव बंडी में सामुदायिक शौचालय में पड़ा ताला। संवाद- फोटो : बंद आंगनबाड़ी केंद्र हड़हवा के बाहर प्रदर्शन करती महिलाएं।