पुवायां। गांव जेबां में श्री शतचंडी महायज्ञ में कथा व्यास अरविंद दीक्षित ने अहिल्या उद्धार और पुष्प वाटिका प्रसंग सुनाया।
कथा व्यास ने सुनाया कि अहिल्या ब्रह्मा जी की मानस-पुत्री थीं। अहिल्या अपने समय की सबसे सुंदर स्त्री मानी जाती थीं। देवता भी उनसे विवाह करना चाहते थे। अहिल्या का विवाह गौतम ऋषि से हुआ। एक दिन गौतम ऋषि आश्रम से बाहर गए थे। जब वह नहीं थे तो देवराज इंद्र उनका रूप धारण कर आश्रम में पहुंचे और अहिल्या से छल करने का प्रयास किया।
इस बीच गौतम ऋषि आश्रम आ गए और इंद्र को श्राप देने के साथ ही अहिल्या को भी पत्थर की शिला हो जाने का श्राप दिया। रामावतार में श्रीराम का पैर लगते ही अहिल्या को श्राप से मुक्ति मिल गई।
इससे पूर्व यज्ञ स्थल की तमाम श्रद्धालुओं ने परिक्रमा की और प्रसाद चढ़ाया। आयोजन में यजमान शशांक पांडे, वीरपाल मिश्रा, जयनरायण वाजपेयी, सच्चिदानंद, उमेश, वीरेश, रमाकांत का सहयोग रहा। संवाद