कोरोना झूमर बना आकर्षण का केंद्र
बाजार में कोरोना झूमर लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। रंग-बिरंगी झालरों के साथ कोविड के स्लोगन जैसा मॉडल है। इसी तरह ब्लैक एंड व्हाइट झूमर भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। इनके अलावा वाल लैंप, रोप लाइट, फूलों की लड़ी, आरती आदि भी लोगों को खूब पसंद आ रही है।
विभिन्न तरह की झालरें भी लोगों की पसंद बनीं
बाजार में चार एमएम के बजाय आठ एमएम की झालरें काफी पसंद की जा रही हैं। राॅकेट झालर, मोदक, डायमंड, पिक्सल झालर भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। सात मीटर का झालर वाला पाइप 150, कमल का जोड़ 70 रुपये और मोमबत्ती भी खूब पसंद की जा रही है।
व्यापारी हेमंत बजाज ने बताया कि आवाज वाली झालर और विभिन्न तरह के झूमर व सजावटी लाइट का सामान उपलब्ध है। स्वदेशी और प्रदूषण युक्त उत्पादों की लंबी शृंखला लाए हैं। दीये, फैंसी पेड़-पौधे भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। व्यापारी पंकज टंडन ने कहा कि घर को सजाने के लिए विभिन्न तरह की झालरें आई है। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष रेट भी कम हैं। नई तरह की झालरें लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
झालरों की वजह से फीकी पड़ने लगी दीयों की रोशनी
दीपावली के त्योहार पर पूर्व के मुकाबले दीयों की बिक्री नहीं होती है। दीये खरीदने की अपेक्षा लोग सस्ती झालर खरीदकर रोशनी कर लेते हैं। ऐसे में कुंभकार के चाक की गति पर ब्रेक लग गया है। दीया विक्रेता राजू प्रजापति बताते हैं कि दो सौ रुपये सैकड़ा दीये का दाम खुलना चाहिए। बाजार में इतने में कोई लेता नहीं है। दुकान लगाने का स्थान तक मुश्किल से मिलता है। इसके चलते त्योहार पर बिक्री ठीक से नहीं हो पाती है।
रोजा की मठिया कॉलोनी में रामकिशोर ने बताया कि प्रत्येक चीज के रेट बढ़ रहे हैं। मिट्टी के दीपक के दाम चार साल से नहीं बढ़े हैं। इसके चलते खर्च चलाना मुश्किल होता है। तालाबों और पोखर पाट दिए जाने से मिट्टी तक मिलना मुश्किल होती है। गोबर के कंडे व अन्य साधन काफी महंगे हो गए हैं।