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Diwali 2025: झालर से निकलेगी पटाखे-राकेट की आवाज, रोशन होंगे घर-प्रतिष्ठान; बाजार में दिवाली पर क्या है खास

Thu, 16 Oct 2025 12:58 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर

सार

शाहजहांपुर के बाजार में इस दिवाली पर सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र पटाखे और रॉकेट की आवाज करने वाली झालर बनी हुईं हैं। दुकानदारों के मुताबिक इनकी खूब बिक्री हो रही है। प्रदूषण मुक्त झालर बिजली और रिमोट से चलती हैं।
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दुकान में तरह-तरह की झालरें - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शाहजहांपुर में दीपावली के त्योहार पर स्वदेशी उत्पादों से घर और प्रतिष्ठान चमकेंगे। प्रदूषण से बचाने के लिए पटाखे और रॉकेट की आवाज वाली झालर ने बाजार में दस्तक दी है। इसके अलावा विभिन्न तरह की झालरें, बंदनवार, झूमर, दीये आदि लोगों को पसंद आ रहे हैं। मेड इन इंडिया के कलात्मक उत्पादों की खरीदारी का सिलसिला शुरू हो गया है।

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भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद घर लौटने पर दीपावली के त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है। घरों-प्रतिष्ठानों को सजाने के साथ ही दीयों और झालरों से सजाया जाता है। त्योहारों को देखते हुए परंपरागत झालरों के साथ सजावट के सामान से बाजार पटा पड़ा है। सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र पटाखे और रॉकेट की आवाज करने वाली झालर बनीं हुईं हैं।

प्रदूषण मुक्त झालर बिजली और रिमोट से चलती हैं। रोशनी के साथ पटाखे का कार्य करने वाली झालर 1550 रुपये की है। इसी तरह बिजली चलित रंग-बिरंगी बंदनवार भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। इसके दाम नौ सौ रुपये रखे गए हैं। पर्दों पर डाली जाने वाली लाइट भी 450 रुपये में उपलब्ध है। पूजाघर में रखने के लिए शोपीस शिवलिंग भी लोगों को खूब भा रहा है। यह 250 से 400 रुपये में उपलब्ध है। इसके अलावा घरों को सजाने के लिए आर्टिफिशियल फूलों की लड़ी आदि खूब बिक रही है।

 

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कोरोना झूमर बना आकर्षण का केंद्र
बाजार में कोरोना झूमर लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। रंग-बिरंगी झालरों के साथ कोविड के स्लोगन जैसा मॉडल है। इसी तरह ब्लैक एंड व्हाइट झूमर भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। इनके अलावा वाल लैंप, रोप लाइट, फूलों की लड़ी, आरती आदि भी लोगों को खूब पसंद आ रही है।

विभिन्न तरह की झालरें भी लोगों की पसंद बनीं
बाजार में चार एमएम के बजाय आठ एमएम की झालरें काफी पसंद की जा रही हैं। राॅकेट झालर, मोदक, डायमंड, पिक्सल झालर भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। सात मीटर का झालर वाला पाइप 150, कमल का जोड़ 70 रुपये और मोमबत्ती भी खूब पसंद की जा रही है।

व्यापारी हेमंत बजाज ने बताया कि आवाज वाली झालर और विभिन्न तरह के झूमर व सजावटी लाइट का सामान उपलब्ध है। स्वदेशी और प्रदूषण युक्त उत्पादों की लंबी शृंखला लाए हैं। दीये, फैंसी पेड़-पौधे भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। व्यापारी पंकज टंडन ने कहा कि घर को सजाने के लिए विभिन्न तरह की झालरें आई है। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष रेट भी कम हैं। नई तरह की झालरें लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। 
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झालरों की वजह से फीकी पड़ने लगी दीयों की रोशनी
दीपावली के त्योहार पर पूर्व के मुकाबले दीयों की बिक्री नहीं होती है। दीये खरीदने की अपेक्षा लोग सस्ती झालर खरीदकर रोशनी कर लेते हैं। ऐसे में कुंभकार के चाक की गति पर ब्रेक लग गया है। दीया विक्रेता राजू प्रजापति बताते हैं कि दो सौ रुपये सैकड़ा दीये का दाम खुलना चाहिए। बाजार में इतने में कोई लेता नहीं है। दुकान लगाने का स्थान तक मुश्किल से मिलता है। इसके चलते त्योहार पर बिक्री ठीक से नहीं हो पाती है। 

रोजा की मठिया कॉलोनी में रामकिशोर ने बताया कि प्रत्येक चीज के रेट बढ़ रहे हैं। मिट्टी के दीपक के दाम चार साल से नहीं बढ़े हैं। इसके चलते खर्च चलाना मुश्किल होता है। तालाबों और पोखर पाट दिए जाने से मिट्टी तक मिलना मुश्किल होती है। गोबर के कंडे व अन्य साधन काफी महंगे हो गए हैं। 


 
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