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प्रशिक्षण राशि भेजने को मची हाय-तौबा

Wed, 25 Mar 2015 12:19 AM IST
शाहजहांपुर।
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दूरस्थ शिक्षा विधि के माध्यम से शिक्षामित्रों के द्वितीय बैच को वर्ष 2014-15 में प्रशिक्षित किया गया। इस प्रशिक्षण की धनराशि को खंड शिक्षा अधिकारियों के खातों में भेजने को लेकर हाय-तौबा मची है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य ने ये धनराशि बगैर उपभोग प्रमाणपत्र प्राप्त किए भेजने से मना कर दिया है। उन्होंने धनराशि को सरेंडर करने के आदेश दे दिए हैं।
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वर्ष 2014-15 के लिए 36.16 लाख रुपये शिक्षामित्रों के एक साल के प्रशिक्षण के लिए मार्च के दूसरे सप्ताह में आए हैं। इसमें से 47 हजार रुपये डायट में होने वाले प्रशिक्षण पर खर्च किए जाने हैं। इसके अलावा प्रत्येक ब्लाक संसाधन केंद्र को 1.79 लाख रुपये भेजे जाने हैं। सर्व शिक्षा अभियान के वित्त लेखाधिकारी पीपी सिंह ने यह रकम ब्लाक संसाधन केंद्रों पर भेजने की तैयारी भी शुरू कर दी।
दरअसल प्रशिक्षण के लिए भुगतान होना है, सो इसे डायट प्राचार्य की बगैर अनुमति के नहीं भेजा जा सकता है। डायट प्राचार्य ने कहा कि प्रशिक्षण पूर्ण हुए या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें खंड शिक्षा अधिकारियों ने उपलब्ध नहीं कराई है। साथ ही प्रशिक्षण में खर्च हुई धनराशि के उपभोग भी नहीं दिए गए। इसलिए, धनराशि नहीं भेजी जाएगी।
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‘शिक्षामित्रों के प्रशिक्षण की धनराशि जिले को मार्च के दूसरे सप्ताह में प्राप्त हुई। इसे भेजने के बाद ही खंड शिक्षा अधिकारियों से उपभोग प्रमाण पत्र मांगे जा सकते हैं। धनराशि भेजने से पहले उपभोग प्रमाण पत्र मांगने का औचित्य ही नहीं है।’
-प्रेमपाल सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान  

‘सभी ब्लाकों में हुई शिक्षामित्रों के प्रशिक्षण की धनराशि प्राप्त होने की जानकारी मिली है। अभी तक पुट-अप नहीं कराई गई। जब धनराशि पुट-अप कराई जाएगी, तब प्रशिक्षण से संबंधित उपभोग प्रमाण पत्र मांगे जाएंगे। यदि खंड शिक्षा अधिकारी प्रमाण पत्र नहीं देंगे तो धनराशि को सरेंडर कर दिया जाएगा।’
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-गजराज सिंह यादव, डायट प्राचार्य
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