विश्वनाथ सिंह का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन
शाहजहांपुर। 13 साल पहले निगोही के गांव मधवामई में एक ओर जहां रंग चल रहा था तो वहीं दूसरी ओर रंजिश में फायरिंग कर हत्या कर दी गई। तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा के अदालत के फैसले पर पीड़ित पक्ष ने संतुष्टि जाहिर की। हालांकि, दो आरोपियों के बरी होने का मलाल भी है।
गांव के विजय सिंह ने बताया कि विश्वनाथ सिंह उनके फूफा थे। गांव में रहने वाले जयवीर पक्ष से उनकी कोई पुरानी रंजिश नहीं थी। वारदात से कुछ दिन पहले जयवीर पक्ष के एक अवैध निर्माण करने पर विजय ने विरोध किया था। वे लोग इसी बात की रंजिश मानने लगे थे। आठ मार्च 2012 को होली पर रंग चल रहा था। इसी दौरान उसका जयवीर पक्ष के लोगों ने फिर से उससे झगड़ा किया।
उस समय तो वे लोग मौके से चले गए। बाद में वह अपने फूफा विश्वनाथ सिंह व अन्य लोगों के साथ होली मिलने के लिए निकला था। तभी जयवीर और उसके भाइयों व बेटों ने असलहे लेकर उन लोगों को घेर लिया था। वे लोग उससे गालीगलौज करने लगे। इस पर विश्वनाथ सिंह और अन्य ने बीचबचाव का प्रयास करने लगे तो उन लोगों ने तमंचे से फायरिंग शुरू कर दी।
सीने में गोली लगने से विश्वनाथ सिंह की मौत हो गई। विजय सिंह के मुताबिक मुकदमा चलने के दौरान जयवीर पक्ष के लोगों ने समझौते का दबाव भी डाला लेकिन वे लोग नहीं झुके।
वहीं, अदालत में दोषियों के अधिवक्ता ने उनके गरीब होने और पहला अपराध होने का तर्क देते हुए कम से कम सजा सुनाने की बात कही। इस पर अभियोजक की ओर से कहा गया कि उन लोगों ने सीने पर गोली मारकर हत्या की है इसलिए अधिक से अधिक सजा मिलनी चाहिए। अदालत ने जयवीर, उसके बेटे विनोद और भाई को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।
चरस के साथ पकडे गए दोषी को छह वर्ष की सजा
शाहजहांपुर। न्यायालय ने एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे में दोषी पाए गए पुवायां थाना क्षेत्र के गांव नवलपुर निवासी रामकुमार को छह वर्ष की कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। वर्ष 2012 में दर्ज कराए मुकदमे में रामकुमार के पास से 390 ग्राम चरस बरामद हाेने का आरोप था। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट दाखिल की थी। संवाद