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अनामिका के मंच पर भुवनेश्वर का पुनर्जन्म

Sun, 26 Jul 2015 10:41 PM IST
शाहजहांपुर।
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अनामिका नाट्य मंच के बैनर तले अरसे बाद जिस नाटक का मंचन किया गया वह हिंदी नाटक के जनक माने जाने वाले भुवनेश्वर पर ही आधारित था। वरिष्ठ रंगकर्मी चंद्र मोहन महेंदू् ने Òभुवनेश्वर-दर-भुवनेश्वरÓ नाटक को मंच पर उतार कर निसंदेश हिम्मत का काम किया है। नाटक के माध्यम से भुवनेश्वर के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके विचारों से दर्शकों को रू-ब-रू कराने का प्रयास किया गया, जो काफी हद तक कामयाब भी कहा जा सकता है।
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गांधी भवन में मीरा कांत द्वारा लिखित नाटक के मंचन में मंच पर आधा दर्जन कलाकार ही नजर आए, लेकिन वे सभी भुवनेश्वर की सोच को जीवित करने का प्रयास कर रहे थे। इस तरह असंगत नाटककार के रूप में पहचाने गए भुवनेश्वर एक बार फिर जीवित हुए और इस काम को अंजाम दिया अनामिका और उनके महेंद्रू ने। नाटक मंचन में देश दीपक मिश्रा उर्फ अप्पू-भुवनेश्वर, चंद्र मोहन महेंद्रू-अभिनेता, राजेंद्र एस माथुर-निर्देशक, नीलम श्रीवास्तव-अभिनेत्री, आकाश सक्सेना-सज्जाकर और अभिषेक शुक्ला ने चाय वाले का किरदार निभाया।
डॉ. सुरेश चंद्र मिश्र के संचालन में हुए नाटक मंचन की तमाम व्यवस्थाओं में तारिक अहमद खान, आनंद अमृत, नेहपाल गौतम, साधना सिंह, सोनिया गुप्ता, सुहेल खान, संजीव सोनू, ओपी वर्मा, दीपक तिवारी, निखिल महेंद्रू, चित्रांश राज, परविंदर सिंह, आशीष बून, नवीन गुप्ता, शकील, गोपाल कश्यप, कीर्तिकेय मिश्रा आदि का योगदान रहा।
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