योगी आदित्यनाथ सरकार के मंसूबों पर बिजली महकमा पानी फेरने पर आमादा है। गेहूं की कटाई से खाली हुए खेतों में खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे किसानों को सिंचाई के लिए विद्युत चालित सरकारी नलकूपोें से पानी नहीं मिल रहा, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में बमुश्किल आठ से दस घंटे की बिजली सप्लाई के दौरान ओवरलोेडिंग से ट्रिपिंग आदि बाधाएं खड़ी होे रही हैं। ऐसे में तमाम किसान सिंचाई के महंगे विकल्प डीजल पंपिंग सेटों और निजी बोरिंग मालिकों पर निर्भर हैं।
सूबे की सत्ता संभालने के बाद योगी सरकार की मंशा के अनुरूप मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने जिला मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र को 18 घंटे बिजली देेने की घोषणा की। शहरी क्षेेत्र में मामूली कटौती के बावजूद बिजली सप्लाई में सुधार भी हुआ, लेकिन गांवों में बत्ती गुल रहने का पुराना ढर्रा कायम है।
बता देें कि जिले में करीब 4.50 लाख किसान हैं। इसमें लघु-मध्यम जोत के अधिसंख्य किसान नहरों से खेत काफी फासले पर होने के कारण सिंचाई के लिए मानसून की बारिश या फिर सरकारी ट्यूबवेल से आसरा लगाए रहते हैं। मानसून के इंतजार में फसलों की बुुवाई लेट करना समझदारी नहीं और बिजली मिल नहीं रही। ऐेसे में छोटे किसानों को सिंचाई के लिए बड़े फार्मरों समेत गांव के रसूखदारों के आगे बोरिंग से पानी लेने को गिड़गिड़ाना पड़ता है। उधर, विभागीय अभियंता भी मानते हैं कि पॉवर नेटवर्क की खराबियां सप्लाई में बाधा डाल रही हैं।
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लाइन फाल्ट ठीक होने पर भी नहीं सुधरी सप्लाई
तिलहर। नगर क्षेत्र में बमुश्किल दस से 12 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्र में छह से आठ घंटे बिजली दी जा रही है। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई की हालत अत्यंत दयनीय है। तमाम गांवों में आज भी बिजली लाइनें टूटी पड़ी हैं, जिन्हें अब तक ठीक नहीं किया जा सका है। खेतों में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल ही एकमात्र सहारा है, लेकिन बिजली नहीं मिलने से ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। डीजल पंपिंग सेट से निजी बोरिंग से सिंचाई काफी महंगी पड़ने से फसलोें की लागत बढ़ रही है। विभागीय जूनियर इंजीनियर अरुण कुमार यादव बिजली संकट से इनकार करते हुए दावा करते हैं कि देहात क्षेत्र को 10-12 घंटे बिजली दी जा रही है और बिजली का रोना वही लोग रो रहे हैं, जो नियमित रूप से बिल जमा नहीं करते।
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ट्रिपिंग से फसलों की सिंचाई में बाधा
जलालाबाद। ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली देने की जगह मनमाने तरीके से आपूर्ति की जा रही है। इससे फसलों में सिंचाई के लिये ग्रामीणों के सामने डीजल पंप सेट के मंहगे विकल्प के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। नगर के बिजली उपकेंद्र से ग्रामीण क्षेत्र के पांच फीडरों से 42 सरकारी ट्यूबवेल संचालित हैं। उनमें से एक-दो को छोड़ अन्य सभी चालू हालत में हैं, लेकिन बिजली नहीं मिलने से किसानों को उनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। उन्हें अपने खेतों की सिंचाई के लिए डीजल चालित इंजनों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। गांव सुजावलपुर के काश्तकार सर्वेश पाठक, कोठा मंझा के शिशुपाल सिंह, डोलापुर के रामप्रकाश मिश्रा आदि ने बताया कि गांव में पूरे दिन बिजली नही आती। रात में भी बार-बार ट्रिपिंग के चलते ट्यूबवेल चलाकर खेतों में सिंचाई करना मुश्किल हो गया है। पॉवर कारपोरेशन के एसडीओ कुमार विकल के अनुसार दो दिन पहले नगर का नया बिजली उपकेंद्र तिलहर से डाली गई लाइन से जोड़ दिया गया है। इस लाइन से कसबे को सप्लाई दी जाएगी जबकि पुराने उपकेंद्र से ग्रामीण फीडर चलाकर पॉवर सप्लाई में सुधार किया जाएगा।
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पुवायां तहसील में बिजली व्यवस्था का हाल बेहाल
पुवायां। भीषण गर्मी में बिजली कटौती होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुवायां क्षेत्र में बिजली सप्लाई खुटार से ठीक हैं, लेकिन यहां भी 20 घंटे बिजली सप्लाई नहीं मिल रही है। दिन में कई घंटे तक लाइट गायब हो जाती है। बंडा में भी 10 से 12 घंटे तक ही बिजली मिल पा रही है। इससे 18 घंटे बिजली दिए जाने के दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। उधर बंडा के बिजली उप केंद्र के लिए डाली गई 33 हजार केवीए की लाइन चालू करने का दावा भी गलत निकला है। इस बिजली लाइन की अभी तक टेस्टिंग नहीं हो सकी है। बंडा बिजली उपकेंद्र के जेई रविशंकर का कहना है कि अभी लाइन पर काम चल रहा है। लाइन टेस्टिंग में एक दो दिन लग जाएंगे।
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फोटो 43में।
प्रदेेश स्तर पर ओवरलोेडिंग से एक-दो घंटे की कटौती ऊपर से हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को 15-16 घंटे सप्लाई दी जा रही है। कभी-कभी लाइन फाल्ट से कुछ घंटे सप्लाई सामान्य बनाने में लग जाते हैं। उदाहरण के लिए 132 केवी लाइन फाल्ट से पुवायां देहात समेत कुछ गावों में थोड़े समय बिजली संकट रहा।
आरके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कारपोरेशन