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बिजली की डिमांड बनी अफसरों का सिरदर्द

Sat, 25 Apr 2015 12:09 AM IST
शाहजहांपुर
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गर्मी का दौर शुरू होने के साथ जिले में बिजली की बढ़ी डिमांड पॉवर कारपोरेशन के अफसरों के लिए सिरदर्द बन गई है। मांग की तुलना में 29 मेगावाट बिजली कम मिलने और 22 से लेकर 40 प्रतिशत तक लाइन लास से निपटने के लिए महकमे के सिस्टम कंट्रोल को कोई उपाय नहीं सूझा तो नौ घंटे की नियमित कटौती के अतिरिक्त आधी रात को दो से तीन घंटे की आपात कटौती थोपनी शुरू कर दी है।
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जिले में बिजली नेटवर्क से करीब दो लाख उपभोक्ता जुड़े हैं, जबकि मौजूदा सिस्टम करीब एक दशक पुराना है। गर्मी के सीजन में कटौती उस वक्त भी होती थी, लेकिन तब करीब 1.40 लाख उपभोक्ता थे। अब केवल शहरी क्षेत्र में 70 हजार से अधिक उपभोक्ता हैं। हाल ही में चेकिंग अभियान चलाकर शहर के नजदीकी गांवों में करीब चार हजार सस्ते कनेक्शन बांटे जाने से पॉवर नेटवर्क बढ़े हुए लोड से चरमराने लगा है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन दिनों शहर को 72 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के सिस्टम कंट्रोल से बमुश्किल 65 मेगावाट की सप्लाई हो रही है। इसी तरह देहात क्षेत्र के सब स्टेशनों पर 108 मेगावाट की मांग के सापेक्ष सिर्फ 86 मेगावाट बिजली पहुंच रही है। इस तरह जरूरत 180 मेगावाट की है, लेकिन उसमें 29 मेगावाट की कमी आड़े आ रही है।
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यही नहीं, पुरानी हो चुकीं और जरूरत से ज्यादा लंबी लाइनों में भी अनावश्यक बिजली खप रही है। अधिकारी लाइन लास को 20 से 22 प्रतिशत तक सीमित बता रहे हैं, लेकिन विभाग के ही भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार देहात में बड़े पैमाने पर कटिया डालकर बिजली चोरी होने से वहां लाइन लास का दायरा 40 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। जो भी हो, इसका खामियाजा विभाग के साथ अनावश्यक कटौती का सामना करने वाले सैकड़ों उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
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बिलों में हेराफेरी से लाइन लॉस को मिला बढ़ावा
शहर का सर्वाधिक बिजली भार ढोने वाले बहादुरगंज सब स्टेशन के प्रभारी और पॉवर कारपोरेशन जूनियर इंजीनियर संगठन के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय के अनुसार बिलों में हेराफेरी करके राजस्व घटाए जाने से भी लाइन लॉस को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केवल लाइनों में खपने वाले करंट से बिजली का नुकसान नहीं होता, जबकि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इसी भ्रांति का प्रचार करने के लिए पुराने नेटवर्क का रोना रोते हैं।
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कार्यदायी संस्था की ढिलाई बढ़ा रही संकट
कटौती को अनदेखा कर दिया जाए तो भी एपीडीआरपी स्कीम के तहत पॉवर नेटवर्क को अपग्रेड कर रही कार्यदायी संस्था एनकेजी की ढिलाई से बिजली संकट को बढ़ावा मिल रहा है। यह कंपनी दो साल बीतने पर भी लक्ष्य के अनुरूप नई बंच लाइनें डालने के साथ ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने का काम पूरा नहीं कर पाई। एक्सईएन सिटी एके शुक्ला के अनुसार एनकेजी अभी केवल 60 फीसदी काम करा पाई है। लक्ष्य के अनुरूप काम हो गए होते तो ट्रंसफार्मर फुंकने और लाइन फाल्ट जैसी खराबियों से बिजली संकट को बढ़ावा नहीं मिलता।
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अब नहीं होगी रात में आपात कटौती
‘पॉवर कारपोरेशन की पारीक्षा तापीय इकाई में पिछले दिनों आई तकनीकी खराबी की वजह से बिजली उत्पादन घटने पर रात में आपात कटौती शुरू की गई थी। सिस्टम कंट्रोल से पता चला है कि पारीक्षा बिजलीघर की बंद इकाई फिर से चालू हो गई और इसी कारण बृहस्पतिवार रात से आपात कटौती वापस ले ली गई।’
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- आरएस प्रसाद, अधीक्षण अभियंता, पॉवर कारपोरेशन
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