शाहजहांपुर। एसपी सौरभ दीक्षित ने साइबर ठगों से बचने के साथ ही सोशल मीडिया पर दोस्ती के नाम पर भावनात्मक रूप से जुड़ने और बाद में ब्लैकमेल करने वालों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि नजदीकी रक्त संबंधों के अलावा किसी पर भी भरोसा बहुत सोच समझकर करना चाहिए। जागरूकता ही सबसे बड़ा उपाय है।
पुलिस से डरें नहीं, साइबर ठगों से रहे सावधान
अगर कोई पीछा कर रहा है या धमका रहा है ताे पुलिस से मदद लेने में बिलकुल नहीं हिचकना चाहिए। थाने में महिला सुरक्षा केंद्र बनाए गए हैं। पुलिस सिस्टम जनता की मदद के लिए बनाया गया है।
- सोशल मीडिया का बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल करें। उसमें वह सामग्री ही पोस्ट करें जिसका कोई दुरुपयोग न कर सके। सोशल मीडिया अकाउंट को सभी के लिए ओपन न रखें। पासवर्ड मजबूत रखें।
-कोई समस्या होने पर अभिभावकों या टीचर से जरूर साझा करें। अगर ऐसा नहीं करेंगी तो आपको परेशान करने वाले के हौसले बढ़ेंगे।
-पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। अगर कोई पुलिसकर्मी रुपये मांग रहा है तो बगैर हिचक उसकी शिकायत अधिकारियों से करें।
- यातायात नियमों का पालन करें। लाइसेंस, हेलमेट व अन्य जरूरी कागजात लेकर चलें। अभिभावकों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
सवाल-जवाब
सवाल : कई बार किसी के परेशान करने पर भी महिलाएं बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत नहीं करती हैं। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए?
-दिलप्रीत कौर
जवाब : महिला संबंधी अपराधों में महिला की पहचान उजागर नहीं की जाती है। केवल उसके अभिभावक, विवेचना कर रहे अधिकारी को ही उसके बारे में जानकारी होती है। इसलिए बदनामी जैसी कोई बात नहीं होती।
सवाल : पारिवारिक झगड़े होने पर पुलिस किस तरह का रुख अपनाती है?
-प्रियांशी पटेल
जवाब : इस तरह के मामलों में पुलिस पहले दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास करती है। उनकी काउंसलिंग की जाती है। इसके बावजूद बात नहीं बनने पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाती है।
सवाल : अपराधी एक बार पकड़े जाने के बाद जब छूटकर आते हैं तो फिर से अपराध करने लगते हैं। तब उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है?
- शिवानी
जवाब : जेल से छूटकर आने वाले अपराधियों पर पुलिस नजर रखती है। अगर वे दोबारा अपराध करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।