कौशल के हुनर से कागज भी हो जाते हैं जीवंत
वाकई कौशल के हाथों में जादू हैं। जब उसकी उंगलियां कागज पर चलती हैं और कुछ ही देर में पेंटिंग बनकर सामने आती है तो लोग वाह कर उठते हैं। कौशल की तमन्ना बड़ा चित्रकार बनकर देश का नाम रोशन करने की है। गांव नाहिल निवासी खेती किसानी करने वाले हरिकांत तिवारी और ग्रहणी प्रेमलता तिवारी के बड़े पुत्र कौशल की आयु इस समय मात्र 16 वर्ष की है। पढ़ाई में तेज कौशल ने कक्षा पांच के पेपर देने के बाद जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी थी और पास होने के बाद कक्षा छह में शाहजहांपुर के नवोदय स्कूल में दाखिला मिला। कौशल की बहन कंचन उसके साथ ही नवोदय विद्यालय में कक्षा नौ की छात्रा है। कौशल के अनुसार नवोदय स्कूल में आर्ट के शिक्षक नंदलाल ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद कौशल देवी देवताओं के अलावा प्राकृतिक, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण सहित तमाम विषयों पर चित्र बना चुका है। नवोदय स्कूलों की रीजनल प्रतियोगिता में उसकी जल संरक्षण पर बनी पेंटिग को प्रथम स्थान मिल चुकी है। स्कूल में कौशल की बनाई हुई दस से ज्यादा पेंटिंग लगी हुई हैं। कौशल कामर्स वर्ग से पढ़ाई कर बैंक अधिकारी बनना चाहता है और पढ़ाई के साथ ही बढ़िया चित्र बनाकर स्कूल और परिवार का नाम देश में रोशन करना चाहता है। कौशल की बहन कंचन भी चित्रकारी का शौक रखती है और भाई से पेंटिंग के गुर सीख रही है।