शाहजहांपुर। चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला दीवान जोगराज निवासी शरद चंद्र सक्सेना को डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ 47 लाख रुपये की ठगी के मामले में एजेंटों के सरगना को एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया। वह पूर्व में हेयर सैलून चलाता था। व्हाट्सएप नंबर के जरिये पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज दिया। 21 वर्षीय आरोपी के तार हांगकांग और सिंगापुर में बैठे साइबर ठगों से जुड़े हुए हैं।
शरद चंद्र सक्सेना ने चार जून को साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। एसपी ने घटना के खुलासे के लिए एसआईटी का गठन किया। टीम ने विवेचना के बाद तीन जुलाई को झांसी, दिल्ली, लखनऊ, बुलंदशहर आदि जगहों से सात एजेंटों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने एजेंटों के मुख्य सरगना की तलाश शुरू की।
पकड़े गए एजेंटों के मोबाइल से सरगना रियो का नंबर मिला। उसका असली नाम राजा सेन उर्फ रियो निवासी ऐशबाग कॉलोनी, भोपाल, मध्य प्रदेश है। पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो नंबर कोई और चला रहा था। जबकि व्हाट्सएप पर नेट दूसरे नंबर पर चल रहा था। सर्विलांस सेल की मदद से पुलिस ने उसे रोजा थाना क्षेत्र के गांव दिउरिया मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस की पूछताछ में गैंग के तार हांगकांग और सिंगापुर से जुड़े होने का तथ्य मिला है। एजेंटों के जरिये मिले खातों में विदेशों में बैठे साइबर ठग वारदात के बाद धनराशि को खातों में डालते थे। राजा सेन ने पुलिस को बताया कि वह विभिन्न टेलीग्राम ग्रुप में जुड़ा है। इन ग्रुप में हाई लिमिट के करंट व कॉर्पोरेट अकाउंट्स की मांग की जाती है।
इन ग्रुपों में गूगल ट्रांसलेटर की सहायता से हिंदी भाषा को अंग्रेजी व अन्य भाषाओं में अनुवाद कर बात करता था। हाई लिमिट के करंट-कॉर्पोरेट खाते अपने साथियों से प्राप्त करके टेलीग्राम ग्रुप में साझा करता था। सीओ अपराध प्रवीण मलिक ने बताया कि खातों में लेनदेन की गई धनराशि के प्रतिशत के आधार पर क्रिप्टो वॉलेट में यूएसडीटी के रूप में राजा सेन को भुगतान मिलता था। इसे अपने साथियों के साथ बांट लेता था। उसके पास से मोबाइल, दो डेबिट कार्ड, 2150 रुपये व चार सिम बरामद हुए हैं।
दसवीं पास राजा चलाता था सैलून, फिर ठगों के संपर्क में आया
21 साल का राजा सेन दसवीं पास है। वह घर के नजदीक ही सैलून की दुकान चलाता था। उसकी दुकान पर आने वाले साइबर ठगों के संपर्क में आया तो उसने धनी बनने के लिए कार्य करना शुरू कर दिया। मोबाइल का अच्छा जानकार होने की वजह से उसने एजेंटों का गिरोह खड़ा करना शुरू कर दिया। एजेंटों के जरिये भोले-भाले लोगों को कुछ रुपये देकर खाता लेकर गैंग को उपलब्ध कराता था। राजा व उसका गैंग दो से दस प्रतिशत तक कमीशन के लिए काम करते थे। उसने तीन से चार घटनाओं में शामिल होना बताया है।
यह हुई थी घटना
छह मई से 15 मई तक शरद चंद्र सक्सेना को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया था। सेंट्रल बैंक मुंबई से दो करोड़ की धोखाधड़ी का केस होने पर सीबीआई और जस्टिस खन्ना की पेशी के नाम पर एक करोड़ 47 लाख रुपये की ठगी की गई थी। ठगों ने व्हाट्सएप पर जमानत के प्रपत्र भेजने के बाद मोबाइल बंद कर लिया। आरोपियों ने धनराशि को फिनटेक फ्रॉड टीम ने नौ लेयर में 40 बैंक खातों में ट्रांसफर किए थे। इसमें हाई लिमिट के करंट-कॉर्पोरेट अकाउंट्स को मूल खातों के तौर पर प्रयोग किया था।