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Shahjahanpur News: विवेचक ने तैयार किया नक्शा...फुटेज में सिलिंडर लीक होने पर भागते दिखे मजदूर

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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में क्लोरीन गैस के रिसाव के बाद भगदड़ मचने पर प्राचार्य की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट के मामले में पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। विवेचक अस्पताल चौकी प्रभारी ने नक्शा तैयार करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी देखे। जिसमें सिलिंडर लीक होने पर मजदूर भागते नजर आ रहे हैं।
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25 मई को ट्रॉमा सेंटर में गैस का रिसाव होने पर मरीजों व तीमारदारों में भगदड़ मच गई थी। डीएम व एसपी ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी ली। प्रारंभिक बयान देकर अधिकारियों को गुमराह किया गया। घटना की सच्चाई के लिए डीएम ने जांच कमेटी बनाकर एडीएम व नगर मजिस्ट्रेट को भेजकर फुटेज चेक कराई तो क्लोरीन के सिलिंडर से गैस निकलने की बात सामने आई।
मेडिकल कॉलेज की जांच में कबाड़ का ठेका लेने वाले को आरोपी बनाया गया है। डीएम के निर्देश के बाद प्राचार्य ने कबाड़ का टेंडर डालने वाली फर्म के प्रतिनिधि शबाब के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की विवेचना अस्पताल चौकी प्रभारी रामेंद्र नाथ को दी गई है। पुलिस ने मामले की विवेचना को आगे बढ़ाते हुए घटनास्थल का नक्शा तैयार किया, फुटेज देखे। विवेचक के अनुसार, सिलिंडर को खोले जाने के दौरान गैस रिसाव होने पर मजदूर भागते नजर आ रहे हैं।
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चीफ फार्मासिस्ट पर गिर सकती गाज
घटना की जांच में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भले ही चीफ फार्मासिस्ट सुभाष कनौजिया को पुलिस कार्रवाई से बचा लिया लेकिन डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह की सख्ती के बाद उनके ऊपर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। भंडार में रखे सिलिंडर से दुर्गंध आने पर उन्होंने ही बिना टेक्नीशियन की उपस्थिति में मजदूरों से वॉल्ब कसने को कहा था। मजदूरों द्वारा आम सिलिंडर की तरह उसे खोलने का प्रयास किया गया तो रिसाव होने लगा। प्राचार्य के निर्देश पर सीएमएस डॉ.नेपाल सिंह ने विभागीय कार्रवाई के लिए पत्राचार किया है। पूरे मामले की निगरानी डीएम स्वयं कर रहे हैं।
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पांच लाख के सर्जिकल सामान के चोरी का मामला भूली पुलिस
पिछले वर्ष एक जून को पांच लाख के सर्जिकल सामान से भरी पिकअप को पकड़ा गया था। अब तक घटना का राजफाश नहीं हो सका है। कॉलेज के सुरक्षा गार्डों ने स्वयं पिकअप को पकड़ा था। मामले में सीएमएस की ओर से उस समय चीफ फार्मासिस्ट जेडी बंसल समेत तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। प्राचार्य के पत्र के बाद बंसल समेत अन्य आरोपियों को वहां से हटा दिया था। लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर सर्जिकल सामान चोरी कर कहां ले जाया जा रहा था? इस सच्चाई से पर्दा नहीं उठ सका है। एक साल बीतने के बावजूद पुलिस मामले का खुलासा नहीं कर सकी है। गरीबों के लिए आए सर्जिकल सामान की चोरी की गंभीर घटना को अंजाम देने वाली पिकअप का मालिक कौन है, पुलिस यह तक पता नहीं लगा सकी है। पुलिस बड़े मामले पर चुप्पी साधे बैठी है। इंस्पेक्टर अश्वनी सिंह ने बताया कि पूर्व की घटना की जानकारी उन्हें नहीं है।
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