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Shahjahanpur News: जान पर भारी पड़ रहा कमीशन का खेल...मानक को धता बता दौड़ रहीं एंबुलेंस

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शाहजहांपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के सामने खड़ी एंबुलेंस। संवाद
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शाहजहांपुर। अस्पतालों के बाहर खड़ीं निजी एंबुलेंस बिना मानक पूरे किए दौड़ रहीं हैं। मरीजों की जान जोखिम में डाल रहे एंबुलेंस संचालकों का अस्पताल के अंदर से लेकर बाहर तक मजबूत नेटवर्क फैला है। कमीशन के लिए ये सामान्य मरीजों को गंभीर बताकर तीमारदारों को बरगलाकर बरेली, लखनऊ तक ले जाते हैं। मंगलवार को सेहरामऊ दक्षिणी के गांव देवकली की धनदेवी की एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन न होने से मौत के बाद भी जिम्मेदारों पर फर्क नहीं पड़ा। एंबुलेंस संचालक बेधड़क अस्पतालों के बाहर खड़े रहे।
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परिवहन विभाग के दस्तावेजों में 41 सरकारी व 74 निजी एंबुलेंस दर्ज हैं। वहीं, केवल बरेली मोड़ से लेकर अजीजगंज तक ही 50 से ज्यादा एंबुलेंस निजी और राजकीय मेडिकल कॉलेज के बाहर खड़ी रहती हैं। पूरे जिले में इनकी संख्या सैकड़ों में है। मानक के अनुसार, एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ ही पल्स ऑक्सीमीटर, ब्लडप्रेशर मशीन के साथ ही कुशल चालक होना चाहिए।
निजी एंबुलेंस में ऐसा कुछ नहीं मिलता है। मरीज मिलने पर ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था कर मरीज को लाद लेते हैं। रास्ते में दिक्कत होने पर देखभाल करने वाला तक नहीं होता है। कमीशन के लालच में निजी एंबुलेंस चालक सारे नियमों को तोड़कर मरीजों की जान से खेल रहे हैं। सबसे ज्यादा राजकीय मेडिकल कॉलेज में इनका तंत्र फैला है।
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अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मरीज के आने से ही इनका खेल शुरू होता है। अस्पताल से नंबर प्राप्त कर मरीजों के तीमारदारों को कॉल कर गंभीर स्थिति बताकर गुमराह करने लगते हैं। इसके बाद सामान्य स्थिति वाले मरीज को भी गंभीर बताकर लखनऊ, बरेली ले जाकर कमीशन वाले अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता है।
प्रति मरीज चालक को कमीशन मिलता है। रेफर करने वाले के हिस्से भी निजी अस्पताल से कुछ अंश पहुंचता है। बताया जाता है कि कुछ अस्पताल संचालकों ने तो चालकों को एंबुलेंस भी खरीदवा रखी हैं।

डॉक्टर से लेकर वार्ड बॉय तक सेट, बेधड़क अंदर आतीं हैं एंबुलेंस
राजकीय मेडिकल कॉलेज के अंदर निजी एंबुलेंस के खड़े होने पर रोक है। फिर भी एंबुलेंस चालकों की सेटिंग के चलते बेधड़क अंदर तक पहुंचती हैं। मेडिकल कॉलेज के पास दो एंबुलेंस हैं। जर्जर होने के कारण उनका संचालन नहीं होता है। 102 व 108 एंबुलेंस भी जल्दी नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे में डॉक्टर से लेकर वार्ड बॉय तक निजी एंबुलेंस चालकों का नंबर देकर मरीज को भिजवा देते हैं।
पूर्व में सामान्य मरीज को गंभीर बताकर रेफर करने का मामला सामने आने पर शासन तक बात पहुंची थी। तब प्राचार्य ने जांच शुरू कराई थी, लेकिन वह ठंडे बस्ते में चली गई। आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

108 नंबर एंबुलेंस जिले में 37 संचालित हो रही हैं।
102 नंबर एंबुलेंस 34 चल रही हैं।

ये है निजी एंबुलेंस चालकों के रेट
-बिना ऑक्सीजन के 2500 रुपये बरेली तक के वसूलते हैं।
-3000 से 35 सौ रुपये में ऑक्सीजन के साथ बरेली तक लेकर जाते हैं।
-500 से एक हजार रुपये तक शहर के अंदर अस्पतालों तक लेकर जाने का किराया है।

वेंटीलेटर से तकनीशियन तक की सुविधा

गर्भवती महिलाओं को लाने-ले जाने के लिए 102 हेल्पलाइन नंबर एंबुलेंस की सुविधा दी जाती है। इसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ ही ऑक्सीजन सिलिंडर भी रहते हैं। बीपी मशीन, थर्मामीटर, एमबो बॉक्स आदि उपकरण रहते हैं। एंबुलेंस में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन मरीज की देखभाल करते हैं। इसी तरह 108 एंबुलेंस में यही सारे उपकरण रहने के साथ ही रेफर मरीज को सफर के दौरान डॉक्टर के परामर्श की सुविधा रहती है। इसमें हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर डॉक्टर फोन पर ईएमटी का मार्गदर्शन भी करते हैं। यह गंभीर मरीजों के लिए होता है। इसके अलावा पांच एएलएस एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में वेंटिलेटर की भी सुविधा रहती है।

मोटरव्हीकल एक्ट के मानक पूरे नहीं करने वाली एंबुलेंस पर कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही इसे लेकर अभियान चलाया जाएगा। नियमविरुद्ध चलने वाली एंबुलेंस का चालान करेंगे।
- सर्वेश सिंह, एआरटीओ

अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए 102 व 108 एंबुलेंस का प्रयोग करते हैं। मेडिकल कॉलेज की एंबुलेंस का उपयोग नहीं होता है। निजी एंबुलेंस को परिसर में आने से रोकने के लिए पुलिस से पत्राचार किया जाएगा।
- डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज

शाहजहांपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के सामने खड़ी एंबुलेंस। संवाद

शाहजहांपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के सामने खड़ी एंबुलेंस। संवाद

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