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Shahjahanpur News: आज के दिन भड़की थी क्रांति की ज्वाला... एक वर्ष तक आजाद रहा था शाहजहांपुर

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डॉ. विकास खुराना, इतिहासकार।
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शाहजहांपुर। देश के साथ शाहजहांपुर को भले ही 15 अगस्त 1947 में वास्तविक आजादी मिली, लेकिन इससे पहले भी लगभग एक वर्ष तक शाहजहांपुर स्वतंत्र रहा था। 1857 में कलक्टर की हत्या के साथ शाहजहांपुर को क्रांतिकारियों ने स्वतंत्र घोषित कर दिया था। 11 मई 1858 को फिर से अंग्रेजी सेना वापस आई और क्रांतिकारियों को पीलीभीत की ओर खदेड़ दिया।
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इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि 31 मई, 1857 को पूरे देश में एक साथ अंग्रेज अधिकारियों और सैनिकों पर हमले किए जाने की योजना थी, लेकिन मेरठ में यह क्रांति दस मई को ही धधक उठी। 12 मई को मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को दिल्ली के लालकिले में आसीन कर दिया गया।
शाहजहांपुर में मेरठ क्रांति की सूचना 15 मई को आ गई थी। उस समय गैरिसन में 28वीं रेजीमेंट तथा ग्रेनेडियर रेजीमेंट्स तैनात थीं। 31 मई को सुबह साढ़े सात बजे कैंट स्थित सेंट मेरी चर्च में यूरोपीय अधिकारी तथा नागरिक साप्ताहिक प्रार्थना सभा के लिए एकत्रित हुए थे। 28वीं रेजीमेंट की पहली बटालियन के जवाहर सिंह, ठाकुर बिंद्रा प्रसाद, शिव नारायण दुबे के नेतृत्व में तकरीबन 21 सैनिकों ने हाथों में तलवारे, भाले और डंडे लेकर हमला कर दिया।
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शोरगुल सुनकर सबसे पहले चर्च के चैपलिन बाहर निकले। सैनिकों के जोरदार प्रहार से उनका दायां हाथ कट गया। जिला मजिस्ट्रेट जॉर्ज एम. रिक्रेट चैपलिन के पीछे-पीछे बाहर आ गए थे। उनका पीछा जवाहर राय ने किया। तलवार के वार ने उनका चेहरा काट दिया। वह चर्च के मुख्यद्वार से कुछ दूरी पर गिर गए। तब तक चर्च के द्वार भीतर से बंद कर दिए गए। इतने में पुलिस कप्तान सिनीड बंदूक लेकर आ गए।
चर्च तथा शहर में अनेक यूरोपीय अधिकारी तथा नागरिक मारे गए। इनमें परेड ग्राउंड में कैप्टन जेम्स, डाॅ. बॉउलिंग, पादरी मैक्यूलियन, कलक्ट्रेट के क्लर्क स्मिथ, लिमिस्टियर आदि थे। शेष लोगों को सिख सैनिकों की मदद से बाहर निकाला गया। चर्च में मारे गए जिला मजिस्ट्रेट एम. रिक्रेट तथा अन्य यूरोपीय लोगों के शवों अगले दिन चर्च में पूरब तथा उत्तरी दिशा में सामूहिक रूप से तहसीलदार अमजद अली ने दफना दिया था। उनकी कब्रें अब भी वहां मौजूद हैं।
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स्थापित हुआ रुहेला शासन
सैनिकों ने शहर में रुहेला सरकार की स्थापना करवाई तथा शाम को वे दिल्ली की ओर चले गए। एक जून को शाहजहांपुर स्वतंत्र घोषित कर दिया गया। शाहजहांपुर में क्रांति सबसे लंबे समय तक चलती रही। बरेली के खान बहादुर खान की सरपरस्ती में रुहेला सरकार का गठन हुआ। गुलाम कादिर खान जिले के नाजिम बने। अब्दुल रऊफ सेना के कमांडर, चार रेजिमेंट पैदल, नौ घुड़सवार टुकड़ियां तैयार की गईं। हसमत अली शस्त्रागार प्रभारी बने।
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शाहजहांपुर में लंबे समय तक धधकी क्रांति की ज्वाला
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष और इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि दिल्ली, अवध, झांसी जैसे क्रांति के केंद्रों के पतन के बाद प्रख्यात मौलवी अहमद उल्लाह शाह, नाना साहिब, मुगल बादशाह के भतीजे फिरोजशाह, जनरल बख्त खान शाहजहांपुर आकर क्रांति का राष्ट्रीय नेतृत्व कर रहे थे। इसी क्रांति के मध्य शाहजहांपुर जेल पर नौ दिन तक गोले दागे गए थे। क्रांति के बाद जहां शहर का किला ध्वस्त किया गया, जली कोठी जलाई गई।। जवाहर राय सहित अनेक सैनिकों को लखनऊ में फांसी की सजा दी गई। शाहजहांपुर में सबसे लंबे समय तक क्रांति की ज्वाला धधकती रही।

डॉ. विकास खुराना, इतिहासकार।

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