शाहजहांपुर। भारत में ट्रेन भले ही 1853 में पहली बार चली हो लेकिन जिले में रेलगाड़ी एक मार्च 1873 को आई थी। सामरिक सुरक्षा के लिए गोला-स्टेट लाइन बिछाई गई थी। शाहजहांपुर स्टेशन वर्तमान में ए श्रेणी का है।
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष और इतिहासकार डॉ. विकास ने बताया कि शाहजहांपुर में शुरुआत में अवध रुहेलखंड और कुमायूं रुहेलखंड कंपनियां शामिल थीं। बाद में इनका विलय नार्थ इंडियन रेलवेज में हो गया।
डॉ. विकास खुराना ने बताया कि जिले में पहली रेल लाइन अवध रुहेलखंड कंपनी की ओर से बिछाई गई लखनऊ-सहारनपुर मुख्य लाइन थी। यह कहलिया के पास से जिले में प्रवेश करती थी और बहगुल के पुल तक जिले में थी। यह लाइन शाहजहांपुर शहर की उत्तरी सीमा बनाती थी। यह लाइन मार्च 1873 को खुली थी।
दूसरी कंपनी मूलरूप से पर्वतीय रेल कंपनी थी जिसका मुख्यालय बरेली के इज्जतनगर में था। इसने जिले में बीसलपुर से शाहजहांपुर लाइन डाली थी जो पीलीभीत होते हुए कुमायूं तक पहुंचती थी। एक अन्य विस्तार गोला स्टेट रेलवे का था। यह जिले की उत्तर सीमा से गुजरती थी और मूलरूप से भारत की उत्तरी सीमा की सुरक्षा संबंधी सामरिक हितों की दृष्टि से बिछाई गई थी।
यह लखनऊ-सीतापुर-बरेली की स्टेट रेल का विस्तार थी। इस लाइन पर ट्रेन गोला से पीलीभीत तक आज भी चलती है। इसका विस्तार विस्तृत योजना का हिस्सा था जो नेपाल सीमा के साथ साथ आगे दरभंगा, बिहार तक ले जाया गया था।
यह लाइन अप्रैल 1891 में खुली। इसका विस्तार जिले के उत्तर पूर्व में आज भी है लेकिन अब यहां अमान परिवर्तन का कार्य तेजी से हो रहा है। यह मुख्य रूप से जिले के खुटार परगने से गुजरती है। जिले में इसके प्रमुख स्टेशन उत्तरी सेहरामऊ, जोगराजपुरा है। ब्रिटिश गजेटियर इस लाइन को पुवायां तहसील के लिए यह काफी महत्व का बताता है।
आगे चलकर इस लाइन को कुमाऊं तथा रुहेलखंड रेलवे ने लीज पर ले लिया था और पुवायां लाइट रेल द्वारा गंगसरा, पुवायां, बड़ागांव, सिंधौली होते हुए इसे अवध रुहेलखंड लाइन से जोड़ा गया था। इस लाइन से अनेक यूरोपीय आगंतुकों ने यात्राएं की थीं।