फसल खराब होने से परेशान होकर मौत को गले लगाने वाले दो किसानों के परिवार के लोगों को प्रशासन ने कोई मदद नहीं दी है। यहां तक कि फसल खराब होने पर मिलने वाली सहायता भी नहीं दी गई है। इससे परिवार के लोग बेहद परेशान हैं। बड़ा सवाल है कि जब सभी किसानों को फसल खराब होने पर सहायता दिए जाने की बात की जा रही है तो सोसाइड करने वाले किसानों के परिवार वालों को मदद क्यों नहीं दी जा रही है।
केस -एक
शिवदयाल के परिवार वाले रोटी तक को मोहताज
पुवायां। गांव गौंटिया इकघरा के शिवदयाल ने चार एकड़ खेत ठेके पर लेकर गेहूं बोया था। बारिश से नुकसान और लोगों के कर्ज से तंग आकर उसने 22 अप्रैल को घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। शिवदयाल की पुत्री पूजा की 27 अप्रैल को शादी भी थी।
शिवदयाल की पत्नी सावित्री को गांव वालों ने मदद दी। प्रधान उमा देवी ने सावित्री 11 हजार और केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने 11 हजार रुपये की सहायता दी। जबकि प्रशासन से किसी तरह की मदद नहीं मिली। गांव के लोगों के ही संयुक्त प्रयास से पूजा की शादी हुई। अब सावित्री और उनका 15 वर्षीय पुत्र अंशू आर्थिक तंगी से बेहद परेशान हैं। प्रधान उमा देवी ने बताया कि शिवदयाल के परिवार को कोई प्रशासनिक मदद नहीं मिली है।
केस -दो
बालिस्टर सिंह के परिवार को मिले कोरे आश्वासन
पुवायां। सिंधौली के गांव 60 वर्षीय बालिस्टर सिंह पर सात लाख रुपये का कर्ज है। 10 एकड़ गेहूं की फसल खराब हुई तो बालिस्टर ने 22 अप्रैल की रात खेत के पास तालाब में कूद कर जान दे दी। डीएम शुभ्रा सक्सेना ने गांव जाकर मृतक के पुत्र अरुण कुमार से जानकारी ली। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद भी गांव पहुंचे और अरुण को साथ ले जाकर डीएम से परिवार की सहायता करने को कहा। अरुण कुमार ने बताया कि डीएम ने मदद का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक फसल का मुआवजा तक नहीं मिला। मुआवजा पाने को अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। एसडीएम लालबहादुर का कहना है कि किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाए जाने का कार्य चल रहा है। सभी पात्रों को सहायता राशि दी जाएगी।
सूची से काट दिए तमाम किसानों के नाम
पुवायां। गांव पटई के प्रधान राजपाल सिंह ने एसडीएम को पत्र देकर बताया कि उनके गांव में 210 किसान हैं। लेखपाल ने सभी के नाम सूची में लिखे थे, लेकिन मात्र 36 किसानों के लिए ही सहायता राशि के चेक तैयार किए गए हैं। लेखपाल ने शेष किसानों का चेक बनाने से इंकार कर दिया। उन्होंने सभी किसानों को सहायता राशि दिलाने और लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।