कुर्रियाकलां। रमापुर मोड़ पर नवनिर्मित शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को अंतिम दिन कथाव्यास शिवांश कृष्ण महाराज ने राजा परीक्षित के मोक्ष प्राप्ति का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति के लिए प्रेरित किया।
कथा व्यास ने कहा कि तक्षक के डसने के शाप के बाद सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनने के प्रभाव से राजा परीक्षित के मन से मृत्यु का भय समाप्त हो गया और उन्हें परम ज्ञान की प्राप्ति हुई। कथा के अंत में परीक्षित बने शारदा शंकर शुक्ला ने पत्नी तनु के साथ भागवत भगवान की आरती उतारी। कथा श्रवण में शिवराम दुबे, सूर्यकांत शुक्ला, मनु शुक्ला, रश्मि, कुणाल, कन्हैया आदि शामिल रहे। संवाद
पल्हौरा में हवन-पूजन के बाद धूमधाम से हुआ भंडारा
कुर्रियाकलां। पल्हौरा गांव में प्राचीन देवी मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम के बाद सोमवार को हवन पूजन किया गया। बाद में भंडारा हुआ। कथाव्यास आचार्य शशिकांत शुक्ला ने वेदी पूजन कर हवन संपन्न कराया। हवन में यजमानों ने पूर्णाहुति दी। बाद में कन्याओं को भोज कराकर श्यामपाल ने दान-दक्षिणा दी। व्यवस्था में पूर्व प्रधान देवेंद्र सिंह, राकेश कश्यप, रामसेवक,सोनू आदि का सहयोग रहा। संवाद
ज्योति कलशयात्रा का पुष्पवर्षा से किया स्वागत
तिलहर। शांतिकुंज हरिद्वार के गायत्री परिवार की ओर से निकाली गई ज्योति कलशयात्रा सोमवार को सुबह यहां पहुंचने पर कई जगह उसका पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। यात्रा नगर में आने पर सबसे पहले गोसाई मंदिर में आचार्य भानु प्रताप और संक्षिप्त सक्सेना के नेतृत्व में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई गई। बाद में यात्रा बंशी वाले मंदिर, पंजाबी कॉलोनी स्थित गीता मंदिर, साईं मंदिर तथा पोटरगंज स्थित शिव मंदिर पहुंची। यहां भी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। शाम को नई बस्ती स्थित दुर्गा मंदिर में दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने गायत्री मंत्र और यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आध्यात्मिक जागरण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। संवाद
श्रद्धालुओं को सुनाया सीता स्वयंवर का मनोहारी प्रसंग
बंडा। ददिउरी मार्ग पर स्थित सिद्ध बाबा देवस्थान परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा व्यास पंडित कपिल त्रिवेदी ने सीता स्वयंवर का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम भगवान शिव का धनुष खंडित कर देते हैं। इसके साथ साथ ही राजा जनक अपनी पुत्री सीता का उनसे विवाह करने की घोषणा करते हैं। कथा की व्यवस्था में देवस्थान के पुजारी बाबा मंगल दास, रिंकू बाजपेयी, सरोज शुक्ला, हरीश मिस्त्री, सुरेंद्र पाल आदि का सहयोग रहा। संवाद
कुर्रिया कलां के ग्राम पल्हौरा के प्राचीन देवी मंदिर पर हवन-पूजन करते श्रद्धालु। संवाद