परौर। नारायण नगर पूर्वी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथावाचक धर्मेंद्र शास्त्री ने राजा बलि का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालु श्रोताओं को भावविभाेर कर दिया।
उन्हाेंने कहा कि राजा बलि बहुत ही दानी थे। भगवान ने 52 अंगुल का रूप रखकर उनकी परीक्षा लेते हुए उनसे चार पग धरती मांगी, किंतु तीन पग में तीनों लोक ले लिए। शेष पग नापने के लिए राजा बलि ने भगवान के आगे अपना शीश कर दिया। इससे प्रसन्न भगवान ने उन्हें पाताल का राजा बना कर अंत में मोक्ष प्रदान किया। कथा की व्यवस्था में राजवीर कश्यप, राजवीर सक्सेना, रामदीन सक्सेना, गंगा सिंह, अवधेश कुशवाहा आदि का सहयोग रहा। संवाद