क्षेत्र के गांव कुंडरिया का देवी मेला शुरू हो गया है। यह मेला काफी प्राचीन है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि देवी का उक्त स्थान पांच बार बाढ़ में कट चुका है। छठी बार जेठ के दशहरा पर देवी की स्थापना कराई गई है।
किवदंती है कि जो अमरी कुंडा नाम से खेड़ा है यहीं रुकमणी के पिता रूकुम के अमरगुरु का आश्रम था, जिसे आज अमरी कुंडा के नाम से पुकारा जाता है। यहां हर साल मेला लगता है। श्रद्धालु देवी मां पर पूड़ियां व मिष्ठान चढ़ाते हैं। इस मेले में दूरदराज के लोग अपनी-अपनी दुकानें लगाते हैं। मेला में लोगों ने खूब खरीददारी की। साथ ही बच्चों ने झूलों का आनंद लिया।