शाहजहांपुर। रील बनाने के फेर में युवा कभी हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के साथ तो कभी अन्य जोखिमभरे स्थानों पर स्केटिंग करने से गुरेज नहीं कर रहे। ताजा मामला बंद रेलवे क्रॉसिंग से स्केटिंग करते नाबालिग छात्र का सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। जरा-सा अनियंत्रित होने से जान पर भी बन सकती थी। विशेषज्ञ इस प्रवृत्ति को मानसिक बीमारी से भी जोड़ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लाइक-कमेंट पाने की होड़ में तमाम युवा करतब दिखाने के लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं। अभिभावक भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। हाल में ही इंदिरा नगर रेलवे क्रॉसिंग से स्केटिंग करते हुए गुजरे एक छात्र का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तो जीआरपी ने उसके पिता को तलब कर लिया।
नाबालिग होने के कारण छात्र पर कार्रवाई नहीं की गई और पिता को हिदायत देकर छोड़ दिया। इससे पहले भी ट्रेन के सामने या रेलवे ट्रैक पर खतरनाक ढंग से वीडियो शूट करने पर जीआरपी ने कार्रवाई की थी। इसके बावजूद लोग मानने को तैयार नहीं हैं। स्केटिंग की कोच जैनब बतातीं हैं कि बगैर सुरक्षित उपायों के स्केट करना काफी खतरनाक हो सकता है।
जरा-सी चूक से संतुलन बिगड़ा तो जान पर भी बन सकती है। उन्होंने कहा कि स्केटिंग कहीं भी नहीं कर सकते। उसका अपना क्षेत्र होता है। वहां पर ट्रैफिक बिलकुल नहीं होना चाहिए। बगैर हेड, एलबो, शिन गार्ड पहने स्केटिंग नहीं करनी चाहिए। अगर रील बनाते हैं तो ध्यान भटकने का खतरा भी होता है।
अभ्यास क्षेत्र में ही स्केटिंग करनी चाहिए। स्केटिंग करते समय अगर गति नियंत्रित न रही तो हादसा हो सकता है। इसे खेल के तौर पर ही लें न कि रीलबाजी का शौक पूरा करने में इसका इस्तेमाल करें। सबसे पहले अभिभावकों को इसके लिए सचेत करता हूं कि बच्चों के स्केटिंग का स्थान तय करें। बगैर सुरक्षा उपायों के स्केटिंग खतरनाक हो सकती है। चोट लगने से पहले ही नियमों का पालन करें तो ज्यादा बेहतर होगा।
- अमन चौधरी, स्केटिंग कोच
सोशल मीडिया पर अति सक्रियता मानसिक बीमारी है। दिमाग का जो हिस्सा हमें खतरे का संकेत देता है, वह बच्चों में विकसित नहीं हुआ होता है। इसी वजह से खतरा मोल लेने से नहीं घबराते। सोशल मीडिया में किसी भी कीमत पर वायरल होने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। हमारे देश में अभी इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर नियमावली नहीं बनी है। अभिभावकों के साथ ही स्कूलों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को इंटरनेट के सही इस्तेमाल के लिए प्रेरित करें।
- डॉ. अभिनव रस्तोगी, मनोचिकित्सक, राजकीय मेडिकल कॉलेज
अमन चौधरी, स्केटिंग कोच