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Shahjahanpur News: 52 हजार में तय हुआ था सौदा, एक महीने से लाइसेंस के लिए टरका रहे थे सहायक आयुक्त खाद्य

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खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहीत अधिकारी विजय वर्मा के पकड़े जाने के बाद बंद उनका कार्यालय। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला गौहरपुरा निवासी कयूम ने तीन महीने पहले मीट का लाइसेंस बनवाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के कार्यालय में आवेदन किया था। उन्होंने सीधे सहायक आयुक्त खाद्य-ग्रेड द्वितीय विजय वर्मा से संपर्क साधा था। आरोप है कि 52 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था। कयूम ने कई बार में रुपये दे भी दिए थे। 12 हजार रुपये नहीं पहुंचने पर उसे लाइसेंस के लिए करीब एक महीने से टरकाया जा रहा था। परेशान होने पर कयूम ने विजिलेंस से संपर्क साधा था।
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सर्वजन हिताय मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष कयूम भैंस के मीट की सप्लाई के लिए लाइसेंस लेना चाहते थे। तीन महीने पहले आवेदन करते समय दस हजार रुपये दिए थे। आरोप है कि सहायक आयुक्त खाद्य विजय वर्मा ने उनसे खुद डील की थी। कहा था- लाइसेंस बन जाएगा, लेकिन रुपये खर्च होंगे। 22 हजार रुपये लाइसेंस और 30 हजार रुपये अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के मिलाकर 52 हजार रुपये मांगे थे। कयूम ने रुपये देने की हामी भर दी। कई बार में वह 40 हजार रुपये दे चुके थे।
रुपये देने के बाद भी कयूम को लाइसेंस नहीं मिला था। विजय वर्मा लगातार उन्हें कार्यालय के चक्कर लगवा रहा था। परेशान कयूम ने बरेली में रहने वाले भांजे से संपर्क साधा। भांजे ने विजिलेंस बरेली का नंबर दिया था। विजिलेंस से फोन पर संपर्क करने के बाद बरेली में मुलाकात कर पूरी जानकारी दी थी। सर्व हिताय मोर्चा के जिलाध्यक्ष मोहम्मद नबी आजाद ने बताया कि विजय वर्मा के 12 हजार रुपये शेष रह गए थे। वह कुछ रियायत करने को भी तैयार नहीं था।
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एक सप्ताह पहले आई टीम ने देखी थी लोकेशन
विजिलेंस टीम ने एक सप्ताह पहले आकर गोपनीय जांच की थी। टीम ने कयूम से संपर्क साधा। उनसे बातचीत करने के बाद दफ्तर जाकर लोकेशन देखी थी। पूरा दफ्तर घूमने के बाद भी टीम ने किसी से बातचीत नहीं की थी। नक्शा बनाकर टीम लौट गई थी।
नगर निगम और पुलिस की एनओसी के नाम पर वसूले थे रुपये
विजय वर्मा ने मीट लाइसेंस के लिए तीन विभागों के नाम पर रुपये तय किए थे। कयूम के मुताबिक नगर निगम और पुलिस की एनओसी के नाम पर 30 हजार व लाइसेंस जारी करने के 22 हजार रुपये मांगे थे। आश्वस्त किया था कि रुपये देने के बाद उन्हें किसी विभाग में जाकर एनओसी के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
तीन गाड़ियों में आई टीम, तीन नोट गिनते ही दबोच लिया
बृहस्पतिवार को विजिलेंस की टीम तीन गाड़ियों में करीब 11 बजे यहां पहुंची। डीएम की अनुमति के बाद कलक्ट्रेट के कर्मचारी नरेंद्र व एजाज को साथ लिया। फिर कयूम को टीम के एक सदस्य के साथ अंदर भेजा। शिकायतकर्ता ने विजय वर्मा को दो-दो हजार रुपये के छह नोट दिए। विजय ने नोटों को गिनना शुरू किया। वह तीन नोट ही गिन पाया था, तभी उसका हाथ पकड़ लिया। फिर टीम के अन्य सदस्य भी आ गए। उन्होंने हाथ पानी से धुलवाए तो लाल रंग छूटने लगा। इसके बाद विजय को टीम बरेली ले गई। यह कार्रवाई सिर्फ 30 मिनट ही चली। टीम ने दफ्तर की फाइलों को चेक किया। अलमारी में कयूम की फाइल रखी मिली।
मीट लाइसेंस के नाम पर चलता बड़ा खेल
कोरोना के बाद पशु कटान बंद हो गया था। ककरा स्थित स्लाटर हाउस पर भी पाबंदी लगा दी गई। बरेली के स्लाटर हाउस से मीट लाकर छोटी दुकानों को सप्लाई किया जाने लगा था। कोरोना के खत्म होने के बाद भी बरेली से चार लाइसेंस धारक मीट लाकर नगर की करीब 60 दुकानों को बिक्री करते हैं। अच्छी कमाई होने के चलते लाइसेंस के नाम पर भी मनमाने रुपये वसूले जाते हैं।
दफ्तर में ताला लगाकर चले गए अधिकारी-कर्मचारी
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद कलक्ट्रेट व आसपास के दफ्तरों में खलबली मच गई। एफएसडीए अधिकारी और कर्मचारी विजिलेंस टीम के जाने के बाद कार्यालय में ताला जड़कर चले गए।
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