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क्रास वोटिंग में डूबी सपा की नैया

Thu, 07 Jan 2016 09:06 PM IST
शाहजहांपुर।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनावी नतीजे ने सत्ताधारी दल सपा जिस तरह चित हो गई, उससे इसके रणनीतिकार भी सन्न रह गए। कुछ वोट इधर-उधर होने की आशंका तो थी लेकिन कांटे की टक्कर की बजाय सपाट हार मिलने जैसी आशंका तो कतई न थी। अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए पार्टी हाईकमान की ओर से राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल नामांकन के दिन भी डटे और बीती रात से ही बहुमत की संख्या में जिला पंचायत सदस्यों का अपने सामने परेड कराते रहे। बृहस्पतिवार सुबह मतदान के लिए सदर बाजार स्थित एक होटल में हुई परेड में कुल 32 जिला पंचायत सदस्य मौजूद थे, लेकिन घोषित परिणाम में सपा को मिले सिर्फ 20। यानी परेड में साथ दिखे सदस्यों में से करीब आधे ने पाला बदलकर क्रास वोटिंग की। नतीजा यह हुआ कि पंचायती सियासत में सपा की नैया डूब गई।
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क्रास वोटिंग की बात सपा जिलाध्यक्ष और नगरपालिका चेयरमैन तनवीर खां भी स्वीकारते हैं। कहा कि किसने क्रास वोटिंग की यह तो पार्टी आला कमान पता लगाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई भी आला कमान के स्तर पर तय होगी। इसी क्रम में शाहजहांपुर में पंचायती सियासत में सपा की किलेबंदी को धराशाई करने में एक बड़ी वजह बाबा कोठी का भी आखिरी वक्त में न्यूट्रल होना रहा। बाबा परिवार के जीवेश प्रसाद खुटार से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं और एक ही नारे पर वोट मांगा था कि अध्यक्ष चाहिए तो मुझे वोट दें और सदस्य चाहिए तो किसी भी अन्य को दें। जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद शहर में स्थित बाबा कोठी परिसर में निर्वाचित सदस्यों की लगातार चहल-पहल बनी रही एवं यही कयास लगते रहे कि आखिरी क्षणों में बाबा परिवार से नामांकन होगा जिसे सपा के विभिन्न धड़ों से जुड़े लोगों का भी समर्थन मिलेगा, लेकिन शाहजहांपुर की सामान्य सीट पर सपा ने निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह के रूप में आरक्षित कोटे वाली पुरानी प्रत्याशी को उतारा तो बाबा कोठी ने चुनावी होड़ से अचानक किनारा कर लिया। साथ ही कोठी ने जिपं अध्यक्षी के लिए नामांकन के दौरान अपने मिजाज का खुला संकेत भी सपा के खिलाफ ही दिया। भाजपा प्रत्याशी अजय पाल सिंह यादव के लिए बाबा कोठी के विश्वस्त माने जाने वाले सुधाकर त्रिपाठी बतौर प्रस्तावक नामांकन करने पहुंचे थे।
एक बात और कि सपा प्रत्याशी संगठन में विधायक राजेश यादव के खेमे से थीं और जातिगत आधार पर भी संगठन से जुड़े जिपं सदस्य बंट गए। ये दिखने को संगठन की परेड में साथ भले ही थे लेकिन की अपने मन वाली। सूबे के राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा के परिवार से दो बहुएं जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं। ऐसे में यह भी ददरौल से निर्वाचित अपनी बहू और पूर्व जिपं चेयरमैन अर्चना वर्मा को चुनाव में उतारने को इच्छुक थे। इनके बड़े भाई की पुत्रवधू आराधना वर्मा जलालाबाद से जिपं सदस्य चुनी गई हैं। ऐसे में कुल मिलाकर सपा में बिखराव की स्थिति आखिरी क्षण तक बनी रही। दूसरी ओर भाजपा खेमा इसी बिखराव को अपने पाले में भुनाने में गंभीरता से जुटा। यहां तक कि जिपं सदस्य पद तक के लिए हुए चुनाव में अपने-अपने खास प्रत्याशियों का अलग-अलग नामांकन कराने वाली सांसद कृष्णा राज और पार्टी के विधानमंडल दल नेता सुरेश खन्ना जिपं अध्यक्ष पद के लिए पार्टी प्रत्याशी का नामांकन कराने से लेकर परिणाम घोषित होने तक एकराय और एकजुट दिखे।
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...तो फिर नजारा दूसरा होता
जिला पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद सपा के हर धड़े में यह बात खासी चर्चा में है कि सपा जिलाध्यक्ष और नगरपालिका परिषद चेयरमैन तनवीर खां परिवार से यदि कोई दावेदार मैदान में होता तो बाजी सपा के हाथ होनी तय थी। इनके बहनोई ददरौल में तो भाई तिलहर में जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव हार गए थे। अल्पसंख्यक कोटे से जिपं अध्यक्ष पद के लिए दोनों में से किसी एक को प्रत्याशी रूप मेें प्रस्तावित करने की संगठन में पूरी तैयारी भी थी। लेकिन अपने दो खास के हारने के बाद जिलाध्यक्ष भी विभिन्न धड़ों के दावेदारों में से किसी के साथ खुलकर सामने नहीं आए बल्कि आलाकमान पर सब छोड़ दिया था कि उसकी पसंद के प्रत्याशी के पक्ष में जी-जान लगाएंगे।


परदे की ओट में खूब हुई सौदेबाजी
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए संपन्न हुए चुनाव में सदस्यों की खरीद-फरोख्त जमकर हुई। हारने वाली सपा और जीत दर्ज करने वाली भाजपा के पदाधिकारी इस सवाल पर मुस्कराकर मौन रह गए। चर्चा है कि एक सदस्य का खुला रेट हर ओर से करीब बीस से 25 पेटी का रहा। सपा प्रत्याशी के लिए सदस्यों का मोल चुकाने वाले फाइनेंसरों की कमी की भी चर्चा सामने आई और आखिरी क्षणों में पार्टी हाईकमान के निर्देश पर संगठन से जुड़े कुछ दिग्गजों ने बेमन से थैली खोली जबकि दूसरी ओर भाजपा की ओर से कमान संभाले दिग्गज इस मामले में शुरू से ही खासे संजीदा रहे।
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