पुवायां के राजीव चौक पर लगा सौ फुट ऊंचा तिरंगा। संवाद
पुवायां। राजीव चौक पर सौ फुट ऊंचा तिरंगा लगने के नौ महीने बाद जारी टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। वहां पहले से स्थापित तिरंगे को ही सरकारी संपत्ति माना जाएगा। सीडीओ ने बताया कि मामले में जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
शाहजहांपुर-पीलीभीत के एमएलसी डाॅ. सुधीर गुप्ता ने विधायक निधि से राजीव चौक पर सौ फुट ऊंचा तिरंगा लगाने का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव पर कोई टेंडर आदि नहीं जारी हुआ, लेकिन नौ जनवरी 2024 को खुद एमएलसी ने इसके लिए राजीव चौक पर भूमि पूजन किया था। इसके बाद तिरंगा लगाने के लिए खंभे की स्थापना का काम शुरू किया गया था, तब इसकी लागत लगभग दस लाख रुपये बताई गई थी। खंभे बनने के बाद सौ फुट की ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज लगा दिया गया और 10 मार्च 2024 को कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना से इसका लोकार्पण भी करा दिया गया था।
तिरंगा लगने के नौ महीने बाद दस दिसंबर को टेंडर खाेले जाने के लिए 13 नवंबर को टेंडर जारी कर दिया गया। राजीव चौक पर सौ फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज लगाने के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन सतीशचंद्र राघवेंद्रम की ओर से टेंडर जारी किया गया था, जिसमें कार्य की अनुमानित लागत 15,70,500 रुपये बताई गई है। बड़े गोलमाल की खबर को अमर उजाला के 22 नवंबर के अंक में प्रकाशित किया गया था। खबर छपने पर डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने संज्ञान लिया था और आरईएस के अधिकारियों को बुलाकर मामले की जानकारी ली थी। डीएम ने मामले की जांच सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह को सौंपी थी।
अब राजीव चौक पर लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज को सरकारी संपत्ति घोषित करते हुए जारी की गई निविदा को निरस्त कर दिया गया है। मामले में जांच अभी जारी रहेगी और जांच के बाद साफ होगा कि बिना निविदा के सौ फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज कैसे लगा दिया गया और इसके पीछे किस तरह से घोटाला करने की मंशा थी। निविदा निरस्त होने से तिरंगा लगाने वाले ठेकेदार और निविदा जारी करने वाले ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में खलबली मची हुई है। जांच के बाद इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
प्रकरण में जांच चल रही है। लगा झंडा सरकारी संपदा ही माना जाएगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है।
- डॉ. अपराजिता सिंह, सीडीओ शाहजहांपुर