न्यूनतम मजदूरी भुगतान व्यवस्था लागू करने सहित छह सूत्री मांगें सरकार द्वारा अनसुनी किए जाने के विरोध में टेलीकॉम केजुअल एंड कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन से जुड़े दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों ने मंगलवार से तीन दिवसीय हड़ताल छेड़ दी। कर्मचारियों की हड़ताल से बीएसएनएल का लाइन मेंटीनेंस वर्क और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण के काम में ठहराव आ गया है।
हड़ताली कर्मचारी रोजाना की तरह टेलीफोन एक्सचेंज पहुंचे, लेकिन नियमित काम करने के बजाय एक्सचेंज भवन के बाहर गोलबंद होकर कर्मचारी नेताओं के नेतृत्व में नारेबाजी के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया। बाद में वहीं पर कर्मचारी भूख हड़ताल के साथ धरना पर जम गए और सभा करके केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार किए। इस मौके पर यूनियन के जिलाध्यक्ष सूर्यनारायण शुक्ला ने दैनिक वेतनभोगी और संविदा स्टाफ की उपेक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार की अनदेखी से इन कर्मचारियों को तमाम विपरीत हालातों का सामना करना पड़ रहा है।
सभा का संचालन करते हुए यूनियन के जिला सचिव संजय गिरि ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों को न तो न्यूनतम मजदूरी का लाभ दिया जा रहा है और न ही वेतन का समय से भुगतान किया जाता है। ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाओं से वंचित संविदा स्टाफ को दूरसंचार निषिद्ध क्षेत्र के होने के बावजूद विभाग स्तर से परिचय पत्र जारी नहीं होने से उन्हें अक्सर अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
इस संबंध में दूरसंचार मंत्रालय के नाम तैयार ज्ञापन में दैनिक वेतनभोगी व संविदा कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू कानून करने, वर्षों से लंबित मजदूरी का समय से भुगतान कराने, विभाग में कार्यरत मजदूरों की अनावश्यक छटनी रोकने, छटनीशुदा कर्मचारियों को दोबारा काम पर लिए जाने आदि मांगों का उल्लेख है।