शाहजहांपुर। शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने नवाचारों से विद्यालयों की तस्वीर बदलने के साथ बच्चों को जीवनोपयोगी सीख भी दे रहे हैं। किसी ने आईसीटी लैब के जरिये बच्चों को तकनीक से जोड़ा तो किसी ने बचत की आदत विकसित की। वहीं पर्यावरण संरक्षण और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी शिक्षकों ने नई पहल की। शिक्षक दिवस पर ऐसे ही शिक्षकों की कोशिशें नजीर बनकर सामने आई हैं। संवाद
आईसीटी लैब में बच्चों को कंप्यूटर सिखा रहे राजकिशोर
कलान के चौराबगर खेत निवासी राजकिशोर सिंह ने पुलिस विभाग की नौकरी छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र को अपना मिशन बना लिया। तिलहर के कंपोजिट विद्यालय आजमाबाद में सहायक अध्यापक राजकिशोर बच्चों को पढ़ाने के साथ खेलकूद और कंप्यूटर शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं। बीटेक कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर चुके राजकिशोर वर्ष 2021 में 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत सहायक अध्यापक पद पर चयनित हुए थे। वह आईसीटी लैब के माध्यम से बच्चों को कंप्यूटर के पार्ट्स, सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीकी जानकारी देते हैं। उनका कहना है कि कंप्यूटर का ज्ञान हासिल कर बच्चे छोटे-छोटे कोर्स करके रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
प्रेरणा बैंक से बच्चों में डाली बचत की आदत
बंडा के प्राथमिक विद्यालय ददिउरी के सहायक अध्यापक लाल सिंह कुशवाहा के नवाचार ने बच्चों में बचत की आदत डाल दी है। वह कक्षा एक से ही बच्चों को छोटी-छोटी रकम बचाने के लिए प्रेरित कर रहे है। कई बच्चों के पास अब दो-दो गुल्लक हैं। घर से मिलने वाले रुपयों में से कुछ रकम बच्चे गुल्लक में जमा करते हैं। कक्षा पांच पास करने वाले 12 बच्चों की गुल्लक खोली गई तो उसमें काफी रुपये मिले। अभिभावकों के सामने गुल्लक फोड़कर बच्चों की जमा रकम निकाली जाती है। उनका उद्देश्य बच्चों में बचत के साथ जिम्मेदारी और भविष्य के लिए धन सुरक्षित रखने की आदत विकसित करना है। वह पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काम कर रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहीं अर्चना
ददरौल विकासखंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय मौजमपुर में सहायक अध्यापक अर्चना गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनूठी पहल की है। उन्होंने विद्यालय और ग्रामीण क्षेत्र में पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए हैं। इन्हें स्कैन करने पर संबंधित पेड़ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मोबाइल फोन पर मिल जाती है। बच्चे क्यूआर कोड स्कैन कर विभिन्न पेड़ों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। उन्होंने विद्यालय में इको क्लब फॉर मिशन लाइफ का गठन कर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के साथ उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास शुरू किया है। इको क्लब की अधिकांश गतिविधियां बच्चों के माध्यम से ही संचालित कराई जा रही हैं। क्लब में प्रत्येक कक्षा से चार विद्यार्थियों को शामिल कर समिति बनाई गई है। एक छात्र को क्लब का कैप्टन बनाया गया है। बच्चों को खेल-खेल में पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए सांप-सीढ़ी भी तैयार की गई है।
बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहीं नंदिनी
भावलखेड़ा के ग्राम सिमरई स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका नंदिनी कश्यप छात्राओं को शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ा रही हैं। स्वच्छता जागरूकता और मीना मंच के सशक्तीकरण में भी नंदिनी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। मीना मंच की नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए वह जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रही हैं। प्रत्येक शनिवार को मीना मंच के माध्यम से छात्राओं के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
नंदिनी कश्यप।
नंदिनी कश्यप।
नंदिनी कश्यप।