शाहजहांपुर। सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने के आदेश से खलबली मची है। वे खुद पढ़ें या बच्चों को पढ़ाएं, इसे लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, शिक्षक नेताओं ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों में खलबली मच गई है। शिक्षण कार्य के अतिरिक्त विभिन्न सरकारी कार्याें के बोझ के तले दबे शिक्षकों के लिए आदेश मुसीबत बन गया है। उनके सामने संकट है कि वे विभागीय कार्य करते हुए बच्चों को पढ़ाएं, या खुद ही पढ़ाई करें।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि यह आदेश उन लाखों शिक्षकों की सेवा भावना और समर्पण की अवहेलना करता है जिन्होंने दशकों तक शिक्षा की मशाल जला रखी है। उन्होंने पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट की मांग की है।
संगठन मंत्री अंकुर त्रिपाठी विमुक्त ने कहा कि शिक्षकों के अनुभव को परीक्षा से आंकना शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय है। महामंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि संगठन तुरंत ही समाधान की मांग करता है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर शीघ्र समाधान निकाला जाए।
सरकार ने मुद्दे पर मौन साध रखा है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। उससे पहले ही समाधान निकालना चाहिए था। संगठन अच्छे वकीलों से सलाह कर रहा है। सरकार से मांग है कि संसद में लाकर निर्णय को रद्द किया जाए।
- ऋषिकांत पांडेय, शिक्षक नेता