शाहजहांपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम पर ताजियेदारी का सिलसिला मंगलवार से प्रारंभ हो गया। सात मोहर्रम पर दिलाजाक स्थित इमामबाड़े में दीदार के लिए ताजिया रख दिया गया। इस बीच अकीदतमंदों ने अमन, खुशहाली व अपनी मन्नतों के लिए दुआएं मांगीं। आयोजन कमेटी ने इस बार पैगी बनाने से इन्कार करते हुए वर्षों पुरानी परंपरा को ठहराव दिया है।
सात मोहर्रम पर दिलाजाक इमामबाड़ा समेत कई स्थानों पर ताजिये लोगाें के दीदार के लिए रख दिए गए हैं। इमामबाड़े में मंगलवार दोपहर से अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों ने फातेहा कराकर मन्नतें मांगी। दूसरी ओर मोहर्रम पर आकर्षण का केंद्र रहने वाले पैगी (हरी शर्ट, सफेद पायजामा और कमर में घुंघरू बांधे युवा) इस बार नजर नहीं आएंगे।
गत वर्ष जुलूस के दौरान हुए विवाद के बाद आयोजन कमेटी ने पैगी बनाने की परंपरा को ठहराव दिया है। प्रत्येक वर्ष करीब पांच सौ पैगी अपना पंजीकरण इमामबाड़े में कराते थे। यह ताजिये के सामने मातम भी करते थे।
शरबत का हुआ लंगर
ताजियेदारी के शुरू होने के साथ ही लंगर का सिलसिला भी शुरू हो गया। मंगलवार को तमाम स्थानों पर शरबत का वितरण किया गया। 27 जून को ताजिये दफन होंगे।
हमारी सातवीं पीढ़ी दिलाजाक इमामबाड़े में ताजिया रख रही हैं। वर्षों से पैगी बनते आए हैं, लेकिन गत वर्ष हुए विवाद के चलते पैगी बनाने की परंपरा को ठहराव दिया गया है।
-हनीफ शाह, ताजियेदार
एसपी ग्रामीण ने लिया ताजिया रखने के स्थानों का जायजा
खुटार। एसपी ग्रामीण दीक्षा भंवरे ने मंगलवार शाम खुटार पहुंचकर नगर में दो स्थानों पर ताजिए रखे जाने के स्थल देखे और लोगों से जानकारी ली।
एसपी ग्रामीण मोहल्ला सरोजनीनगर में इमामबाड़ा पहुंचीं, यहां से एक ताजिया ईदगाह ले जाया जाता है। एक ताजिया मोहल्ला देवस्थान से और एक गांव सौंफरी से ईदगाह पहुंचता है। तीनों ताजिए ऊंचे होते हैं। कई छोटे ताजिए भी ईदगाह मेले में ले जाए जाते हैं। इसके बाद उन्होंने ईदगाह का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सीओ और थाना प्रभारी मौजूद रहे। संवाद
दिलाजाक स्थित इमामबाड़े में ताजिये के सामने दुआ करते अकीदतमंद। संवाद