मम्मी मेरा बैग कहां हैं, मेरी किताब कहां है, पेंसिल बॉक्स भी नहीं मिल रहा है। पानी की बोतल दीदी ने पता नहीं कहां रख दी है, लंच बॉक्स तो यहीं रखा था, अब पता नहीं किधर है आदि जुमले सुबह से ही घरों में गूंजने लगे थे। ऐसा हो भी क्यों न, आखिर पूरे एक महीना दस दिन की लंबी छुट्टी के बाद बुधवार को स्कूल खुल रहे हैं।
वैसे जिस मूड से मौसम ने करवट ली है, उससे लग तो यही रहा है कि सुबह बच्चों की पीठ पर बस्ता शायद ही दिखाई पड़े। मौसम की परवाह किए बिना मंगलवार को बच्चों की खुमारी उतरती दिखी। किसी से जबरदस्ती बस्ता तैयार कराया जा रहा था, तो अधिकांश बच्चे हंसी-खुशी अपने भाई-बहनों के साथ बस्ता सजाने-संवारने में जुटे रहे। हालांकि कापी-किताबें ढूंढने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन यह काम मम्मी-पापा के सहयोग से अंतत: पूरा किया गया। वहीं, महिलाएं लाड़लों की यूनिफार्म चमकानें में व्यस्त दिखीं।
स्कूल खुलने की खुशी 'पप्पू-मुन्नीÓ के चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी। एक दिन पहले बच्चों ने कापी-किताबों पर नई जिल्द चढ़ाई, बस्ते सजाए उनकी मम्मी ने जूतों में पॉलिश कर चमाचम किए, यूनिफार्म भी प्रेस करके टन्न कर दी गई। अब सब कुछ मौसम पर निर्भर है कि स्कूल में बच्चों की रौनक दिखेगी या फिर एक-दो दिन और बोनस की छुट्टी इंद्रदेव की कृपा से हो जाएगी।