डॉ. रोहिताश ईशा। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। पारिवारिक कलह की वजह से अधिकतर महिलाएं अवसाद का शिकार हो रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाएं एक ही बात को बार-बार सोचती रहती हैं। इससे उनकी सोचने की शक्ति प्रभावित होने लगती है और वे मानसिक रोगों का शिकार हो जाती हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. रोहिताश ईशा के मुताबिक, आंकड़े बताते हैं कि भारत में मानसिक समस्या से ग्रसित लोगों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। आने वाले दस सालों में दुनियाभर के मानसिक समस्याओं से ग्रसित लोगों की एक तिहाई संख्या भारतीयों की हो सकती है। बड़ी संख्या में लोगों का गांवों से पलायन हो रहा है। इन सब का असर लोगों के मन-मस्तिष्क पर भी पड़ सकता है। अवसाद बढ़ने की समस्या सबसे ज्यादा सामने आ रही है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में घरेलू हिंसा से प्रताड़ित होकर अवसाद की शिकार महिलाएं अधिक संख्या में आ रहीं हैं। ऐसे मरीजों को घबराहट होना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है। इसके अलावा परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होना भी मानसिक बीमारी का कारण बन रहा है। घर परिवार के बारे में अधिक सोचना और नींद पूरी न होने के कारण भी लोग मानसिक रोगी हो रहे हैं।
मानसिक बीमारी के चलते टूट रहे रिश्ते
डॉ. रोहताश बताते हैं कि जब महिलाएं एडजस्टमेंट डिसऑर्डर की शिकार होती हैं तो उनका व्यवहार विद्रोही हो जाता है। मानसिक तनाव के चलते कई बार पारिवारिक रिश्ते भी प्रभावित होने लगते हैं। महिलाएं अत्याचार व घरेलू हिंसा के कारण कई बार मानसिक अवसाद व तनाव की शिकार हो जाती हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार, अत्याचार या हिंसा के कारण ज्यादातर महिलाएं एडजस्टमेंट डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं।
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