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स्वामी दयानंद ने देश में जागृत किया वेद का ज्ञान : चंद्रदेव

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शाहजहांपुर। टाउनहॉल मार्ग पर आर्य समाज के तत्वावधान में स्वामी दयानंद सरस्वती के जन्मोत्सव और बोधोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को यज्ञ का आयोजन किया गया। वैदिक प्रवक्ता आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि स्वामी दयानंद ने वेद का ज्ञान भारतवर्ष में जागृत किया।
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उन्होंने कहा कि दयानंद स्वामी ने आर्य समाज की स्थापना की। सत्यार्थ प्रकाश जैसा कालजयी ग्रंथ दिया। देश में व्याप्त जातिपात, छुआछूत, भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया। विधवा विवाह कराकर लाखों महिलाओं का उद्धार किया।
उन्होंने सबसे पहले कन्या गुरुकुल खुलवाए। इसके अलावा समाजहित में अनेक कार्य किए। हम सभी को उनका ऋण उतारने के लिए उनका संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में जितेंद्रनाथ आर्य, भुवनेश गुप्ता, आशा गुप्ता, नरेंद्र मिड्ढा, प्रदीप, चंदन, जगवीर, वंदना सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
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भक्त को सही राह दिखाते हैं भगवान : सुरेश



पुवायां। गोमती नदी के पन्नघाट पर चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ में कथा व्यास सुरेशचंद्र मिश्र ने नारद मोह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान हर हाल में भक्त को सही राह दिखाते हैं।



कथा व्यास ने कहा कि एक बार नारद मुनि को कामदेव जीतने का अहंकार हो गया। भगवान विष्णु को पता चलने पर उन्होंने नारद के जाने वाले मार्ग में एक सुंदर नगर बनाकर विश्व मोहिनी नामक राजकुमारी के स्वयंवर की माया रच दी। नारद मुनि विश्वमोहिनी को देखते ही मोहित हो गए और भगवान विष्णु के पास जाकर हरिरूप देने के लिए कहा। विष्णु भगवान ने उनका चेहरा बंदर के जैसा कर दिया। पता चलने पर नारद ने विष्णु भगवान को श्राप दे दिया।
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कथा का संदेश है कि भगवान श्राप धारण कर भी भक्त को सच्चे मार्ग पर ले जाते हैं। कथा के बाद आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। संवाद
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