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सूदखोरों के चक्कर से बचें, 10 से 16 प्रतिशत तक ब्याज पर कर्ज दे रहे बैंक

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शाहजहांपुर। अग्रणी बैंक प्रबंधक सीएस जोशी ने सूदखोरों से बचने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि सरकारी बैंक जहां 10 से 14 प्रतिशत (वार्षिक) ब्याज पर कर्ज मुहैया कराती हैं, तो प्राइवेट बैंक विभिन्न मदों में ब्याज दर 16 प्रतिशत (वार्षिक) तक लेते हैं। वहीं सूदखोर हर महीने काफी अधिक ब्याज लेते हैं।
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अग्रणी बैंक प्रबंधक सीएस जोशी ने बताया कि बैंक एक लाख रुपये पर वर्ष में 10 से 16 हजार रुपये तक ब्याज लेते हैं। जबकि सूदखोर एक लाख पर दस हजार रुपये प्रतिमाह तक ब्याज ले लेते हैं। वार्षिक ब्याज 120 प्रतिशत तक हो जाता है। बताया कि आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार बैंक, कोऑपरेटिव सोसाइटी या रजिस्टर्ड फाइनेंशिल इंस्टीट्यूशन को ही कर्ज दे सकते हैं। इसके अलावा किसी भी प्रकार का कर्ज देने का कारोबार गैर कानून है।
कर्ज देने के लिए रजिस्ट्रार से लाइसेंस लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कारोबार के लिए बैंक लोन देते हैं। इसके लिए आईडी प्रूफ, इनकम टैक्स रिटर्न, रेंट एग्रीमेंट, आधार कार्ड आदि दस्तावेजों के साथ ही कारोबार का प्रोजेक्ट भी बैंक को दिखाना होता है।
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इस तरह बचते हैं सूदखोर
अगर किसी ने एक लाख रुपये एक साल के लिए उधार लिए तो सूदखोर 1.20 लाख रुपये ब्याज जोड़कर शपथ-पत्र में 2.20 लाख रुपये उधारी लिखवा लेते हैं। बड़ी रकम लेने वाले का वे बैंक अकाउंट भी खुलवाते हैं और ब्लैंक चेक पर साइन करवाकर रख लेते हैं। इसी आधार पर वसूली करते हैं।
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बैंकों में कागजी प्रक्रिया है लंबी, नहीं मिलती छोटी रकम
बैंक अधिकारी कागज पूरे होने पर लोन उपलब्ध कराने का दावा करते हैं, लेकिन बैंकों में छोटी रकम आसानी से नहीं मिलती। लाख दो लाख रुपये के लिए भी लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। आईडी प्रूफ, इंकम टैक्स रिटर्न, रेंट एग्रीमेंट, आधार, गारंटर आदि के दस्तावेज दिखाने होते हैं। फिर कारोबार का स्वरूप देखा जाता है। लोन वापसी की स्थिति भी चेक की जाती है। इसमें 10 से 15 दिन लगते हैं। हालांकि अब प्राइवेट बैंकों में लोन मिनटों में हो जाता है।
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सूदखोरों से 10 मिनट में लोन
सूदखोर केवल एक गारंटर के विश्वास पर जरूरतमंद को लोन दे देता है। वह केवल एक शपथपत्र पर लिखवाकर पैसे देता है। बैंकों की लंबी कागजी कार्रवाई और टालमटोल से बचने के लिए भी लोग सूदखोरों के चक्कर में फंस जाते हैं। मगर जल्दबाजी की कीमत बहुत मोटी चुकानी पड़ती है। संवाद
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