जलालाबाद। प्रशासन ने तहसील क्षेत्र में बाढ़ से हुए फसली नुकसान का सर्वेक्षण शुरू करा दिया है। जिन किसानों की फसलों में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें शासन के आदेशानुसार 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा मिलेगा।
गत अगस्त और सितंबर माह में रामगंगा और बहगुल नदियों में दो बार बाढ़ आने के दौरान यहां से लेकर अल्हागंज और दूसरी ओर मदनापुर ब्लाॅक में नदियों के तट पर बसे तमाम गांव दोनों बार लगभग 15-15 दिन तक पानी से घिरे रहे। इस दौरान खेतों में लंबे समय तक डूबी रहीं धान, मक्का, तिल, मसूर, मूंगफली, शकरकंद आदि फसलें भी चौपट हो गईं।
अगस्त में आई बाढ़ में फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन चालू माह के पहले सप्ताह में आई बाढ़ से बची हुई फसलें भी तबाह हो गईं। बाढ़ का प्रकोप थमने के बाद से फसली क्षति से परेशान क्षेत्र के किसान प्रशासन से नष्ट हुई फसलों की क्षतिपूर्ति कराने की गुहार लगा रहे थे।
प्रशासन ने क्षेत्र में नदियों के किनारे बसे 71 गांवों को बाढ़ प्रभावित मानते हुए सभी जगह एक साथ फसली नुकसान का सर्वेक्षण शुरू करा दिया है। प्रभारी तहसीलदार अनुराग दुबे ने बताया कि अब तक 932 किसानों के फसली नुकसान के आकलन की रिपोर्ट मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि सर्वे कार्य में लगे लेखपाल ग्रामवार सर्वे कार्य पूरा करके जो रिपोर्ट दे रहे हैं, उनकी कंप्यूटर पर फीडिंग कराकर रिपोर्ट जिला स्तर पर आपदा राहत प्रभारी को भेजी जा रही है।
उन्होंने बताया कि जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। बाद में 33 प्रतिशत से अधिक फसली नुकसान पाए जाने पर संबंधित किसानों को 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा का भुगतान किया जाएगा।