सुखजीत सिंह अपनी पत्नी से बेहद प्रेम करता था। यही कारण रहा कि सुखजीत की हत्या की योजना बनने के बाद भी उसे मिट्ठू और रमनदीप कौर के प्रेम प्रसंग और गलत इरादों की भनक तक न लग सकी।
रमनदीप कौर पर हद से ज्यादा भरोसा और रमनदीप के हमले के बाद भी सुखजीत सिंह का मामले को दबाना रमनदीप के हौसले बढ़ा गया और इसकी कीमत सुखजीत को जान देकर चुकानी पड़ी थी। डर्बी में रहने के दौरान सुखजीत सिंह और रमनदीप का प्यार परवान चढ़ा तो रमनदीप के परिजन इसके विरोध में आ गए।
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कारण था रमनदीप जाट और सुखजीत कंबोज सिख थे। रमनदीप कौर, सुखजीत को पाने के लिए परिवार के खिलाफ चली गई और सुखजीत से शादी कर ली, तो सुखजीत उस पर आंख बंद कर भरोसा करने लगा था। सुखजीत के डर्बी में रहने वाले बहनोई के अनुसार सुखजीत ने रमनदीप कौर को खुली छूट दे रखी थी और वह लग्जरी लाइफ जीती थी।
खुलेपन और लग्जरी लाइफ पर सुखजीत के रोक नहीं लगाने से रमनदीप कौर सुखजीत सिंह पर हावी होती चली गई। इस बीच सुखजीत के माध्यम से गुरप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू से उसकी बात शुरू हुई तो वह मिट्ठू की ओर आकर्षित हो गई।
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कोई रोक-टोक न होने से मिट्ठू से उसका प्रेम प्रसंग शुरू हो गया। सुखजीत सिंह के डर्बी में रहने वाले बहनोई ने उसे आगाह भी किया, लेकिन सुखजीत ने रमनदीप कौर से कुछ नहीं कहा। नतीजा सुखजीत को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
हमले की बात भी छिपा गया था सुखजीत
सुखजीत सिंह अपनी पत्नी से बेहद प्रेम करता था। यही कारण रहा कि सुखजीत की हत्या की योजना बनने के बाद भी उसे मिट्ठू और रमनदीप कौर के प्रेम प्रसंग और गलत इरादों की भनक तक न लग सकी।
22 अगस्त 2016 को रमनदीप ने सुखजीत पर हमलाकर जान लेने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर घायल सुखजीत बच गए और शाहजहांपुर जाकर इलाज कराने के बाद मां और अन्य लोगों को इस बात की जानकारी नहीं दी कि हमला रमनदीप कौर ने किया है। मां को बताया गया कि हमला शाहजहांपुर से घर लौटते समय अज्ञात लोगों ने किया है।
इसके बाद मां वंश कौर ने अगले ही दिन सुखजीत को नई स्कार्पियो खरीदकर दी थी, जिससे पुत्र और बहू सुरक्षित रह सके। सुखजीत इसके बाद चौकन्ना रहने लगा था, लेकिन उसे यह उम्मीद नहीं थी कि रमनदीप और मिट्ठू उसकी हत्या कर देंगे और दोस्त, पत्नी पर यही विश्वास उसकी मौत का कारण बन गया।
पीछे नहीं हटूंगी, आखिरी दम तक लडूंगी पुत्र के न्याय की लड़ाई
पुत्र सुखजीत सिंह के हत्यारे गुरप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू और बहू रमनदीप कौर को सजा के लिए जमकर संघर्ष करने वाली वंश कौर कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं। रमनदीप और मिट्ठे के वकीलों के हाईकोर्ट में अपील करने की बात पर उन्होंने कहा कि यदि रमनदीप और मिट्ठू बचाव के लिए हाईकोर्ट कोर्ट का सहारा लेंगे तो मैं भी वकील करके उनको बचाव का मौका नहीं दूंगी।