शाहजहांपुर। जनपद के गन्ना किसान अब पॉली हाउस तकनीक अपनाकर पूरे वर्ष में 10 माह तक गन्ने की पौध तैयार कर सकते हैं। कांट क्षेत्र के गांव गंगानगर निवासी प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा ने इसी तकनीक से गन्ना पौध तैयार करके एक साथ कई लाभ अर्जित किए। इस तकनीक से रोगमुक्त प्रजाति के गन्ने की पौध कम लागत में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर फसल पैदावार भी बढ़ जाती है।
कोरोना काल में तत्कालीन प्रमुख सचिव (गन्ना) ने इस पॉली हाउस विधि से गन्ना पौध तैयार करने की योजना को मूर्त रूप दिया था। कृषि क्षेत्र में गन्ना खेती के लिए पॉली हाउस प्रयोग एक नवाचार के समान है, क्योंकि अभी तक इस तकनीक से विशेष जलवायु वाले क्षेत्रों में केवल सब्जी और फल उत्पादन होता रहा है। इस तकनीक की जनपद में पहल करते हुए प्रगतिशील किसान कौशल अपने कृषि फार्म के 84 वर्ग फीट क्षेत्रफल में पाॅली हाउस बनाया है। उसमें आठ परतों वाली बहुमंजिली रैक पर रखीं ट्रे में गन्ना बीज डालकर 25 से 30 दिन में 90 हजार पौध तैयार कर रहे हैं।
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इसलिए है फायदेमंद
प्रगतिशील किसान कौशल इस तकनीक के कई फायदे गिनाते हैं। उनका कहना है कि ज्यादा बारिश होने या फिर सर्दी पड़ने पर बीज का जमाव शिथिल पड़ जाने से पौध तैयार करने में कठिनाई होती थी। पॉली हाउस से मानसून सीजन में भी पौध उगाई जा सकेगी और किसान धान के विकल्प के तौर पर गन्ना उपज ले सकेंगे। बताया कि केवल दिसंबर और जनवरी को छोड़कर हर माह पौध तैयार हो सकेगी। इस तकनीक से समय के साथ स्थान की बचत भी होने के साथ प्रति हेक्टेयर 2600 क्विंटल तक उपज मिलती है जो कि सामान्य विधि से ली गई उपज की तुलना में 15 से 20 फीसदी ज्यादा है।
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2.60 रुपये में बिकती है एक पौध
पाॅली हाउस तकनीक को कारोबार के नजरिए से देखें तो मुनाफे के प्रत्यक्ष प्रमाण दिखते हैं। उदाहरणार्थ, 84 वर्ग फीट का पॉली हाउस करीब तीन लाख रुपये में तैयार हो जाता है। गन्ने की एक पौध 2.60 रुपये में बिकती है। एक माह में 90 हजार से लेकर एक लाख पौध तैयार की जाती है। इस तरह से प्रति माह 2.60 लाख रुपये की आय के हिसाब से वर्ष के दस माह में 26 लाख रुपये आय अर्जित करना संभव है।
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जिले के प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा ने बिहार के एक छोटे किसान को पॉली हाउस तकनीक से गन्ना पौध तैयार करते देख इस तकनीक को प्रदेश में लागू कराने का प्रस्ताव तत्कालीन प्रमुख सचिव गन्ना संजय आर भूसरेड्डी को भेजा था। इस तकनीक में बहुमंजिली रैक का इस्तेमाल कर उन्होंने कम स्थान में ज्यादा पौध तैयार करने में कामयाबी पाई।
-डॉ. संजीव कुमार पाठक, प्रसार अधिकारी, गन्ना शोध परिषद