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सूदखोरों से परेशान दंपती ने फंदे से लटककर दे दी जान

सार

पुलिस की जांच में सामने आया कि सतीश ने दो सूदखोरों से ब्याज पर ढाई लाख रुपये लिए थे।लखीमपुर के पसगवां थाना क्षेत्र के गांव साहबगंज निवासी चोखेलाल के पुत्र सतीश कुमार का परिवार करीब दस साल पहले रोजा क्षेत्र की वसंत विहार कॉलोनी में शिक्षिका चंद्रप्रभा श्रीवास्तव के मकान में किराये पर आकर रहने लगा था। इसके चलते सतीश काफी ज्यादा अवसाद में था।-श्याम नारायण से किया था जिक्र, उसने दिया था हौसलासतीश सूदखोरों की धमकियों से परेशान हो चुका था। मंशा देवी ने सुबह जल्दी उठकर पूूजा पाठ के बाद बच्चों को नाश्ता कराकर सुबह साढ़े आठ बजे स्कूल भेज दिया।
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मंशा देवी। फाइल फोटो - फोटो : SHAHJAHANPUR
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विस्तार
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शाहजहांपुर। रोजा थाना क्षेत्र के हथौड़ा स्थित वसंत विहार कॉलोनी निवासी प्रापर्टी डीलर सतीश कुमार (42) व उनकी पत्नी मंशा देवी (40) ने कमरे में फंदे से लटककर जान दे दी। पुलिस ने सतीश की जेब से सुसाइड नोट बरामद किया है। सुसाइड नोट में सूदखोरों से परेशान होकर आत्महत्या करने की बात लिखी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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लखीमपुर खीरी जिले के थाना पसगवां के गांव साहबगंज निवासी सतीश कुमार करीब दस साल से वसंत विहार कॉलोनी में सरकारी महिला शिक्षक चंद्रप्रभा के मकान में किराये पर रह रहे थे। बृहस्पतिवार सुबह बेटी सौम्या और बेटा शेखर स्कूल चले गए। उनके जाने के बाद दंपती ने कमरे में रस्सी को पंखे में डालकर फंदा बनाया और लटककर जान दे दी। करीब साढ़े दस बजे स्कूल से लौटी सौम्या ने माता-पिता के शव देखकर शोर मचाया। इसके बाद मोहल्ले के लोग इकट्ठा हो गए। वह पड़ोस में रहने वाले ताऊ श्यामा नारायण मौर्य के घर पहुंची। श्याम नारायण की पत्नी विमला व बेटा आशुतोष तुरंत मौके पर पहुंचा। इस बीच रोजा पुलिस भी आ गई। उन्हें सतीश का शव फंदे से लटका मिला। जबकि बेड पर मंशा देवी का शव पड़ा था। एसपी सिटी संजय कुमार ने मौके पर पहुंचकर जांच की। एसपी सिटी ने बताया कि सतीश की जेब से सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने कर्जे के चलते जान देने की बात लिखी है। फोरेंसिक एक्सपर्ट भी जांच कर रहे हैं।
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ढाई लाख का था कर्ज, वापसी को धमकी रहे थे सूदखोर
शाहजहांपुर। प्रापर्टी डीलर सतीश पिछले छह महीने से काफी ज्यादा परेशान थे। उनके प्लॉटों की बिक्री न होने के कारण घर में भी आर्थिक संकट खड़ा होने लगा था। उसके विपरीत सूदखोर उससे तकाजा कर रहे थे। सतीश ने ब्याज समेत रुपये अदा करने का वादा किया था। फिर भी सूदखोर उसे बार-बार धमका रहे थे। सूदखोरों की धमकी से आजिज आकर बृहस्पतिवार को सतीश व उसकी पत्नी मंशा देवी ने फंदे से लटककर जान दे दी। पुलिस की जांच में सामने आया कि सतीश ने दो सूदखोरों से ब्याज पर ढाई लाख रुपये लिए थे।
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लखीमपुर के पसगवां थाना क्षेत्र के गांव साहबगंज निवासी चोखेलाल के पुत्र सतीश कुमार का परिवार करीब दस साल पहले रोजा क्षेत्र की वसंत विहार कॉलोनी में शिक्षिका चंद्रप्रभा श्रीवास्तव के मकान में किराये पर आकर रहने लगा था। थोड़ी दूरी पर सतीश के भाई श्याम नारायण मौर्या ने मकान बनवाया था। श्याम नारायण बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक हैं। उनक ज्वाइनिंग मोहम्मदी क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय गेहूंआ में हैं। 2018 में सतीश ने प्रापर्टी डीलिंग का काम शुरू करने का प्लॉन बनाया और श्याम नारायण से सहयोग मांगा था। शिक्षक श्याम नारायण ने एचडीएफसी बैंक से 15 लाख का पर्सनल लोन कराया और भाई सतीश की मदद करते हुए 13 लाख रुपये दे दिए थे। रुपये हाथ में आने के बाद सतीश ने जमीन का एग्रीमेंट करते हुए प्लॉटों की बिक्री शुरू कर दी। इस बीच कोविड-19 की दस्तक के चलते तीन साल कुछ काम नहीं हो सका।
कोरोना का ग्राफ नीचे आने के बाद सतीश ने फिर से काम शुरू करने का प्रयास किया। उसकी सारी जमीन रिंग रोड क्षेत्र में आने से प्रशासन के हाथ चली गई। श्यामनारायण के मुताबिक उसका मुआवजा भी उसके हाथ में नहीं आ सका था। लाखों रुपये की जमीन हाथ से निकलने के बाद सतीश परेशान रहने लगा था। इस बीच उसने चिनौर के पास जमीन लेकर प्लॉट बेचने का मन बनाया। रुपये की जरूरत पड़ी तो उसने फिर श्याम नारायण की मदद मांगी। श्याम नारायण के मुताबिक, उन्होंने अपने एक शिक्षक दोस्त के जरिये सतीश को एक लाख रुपये पांच प्रतिशत मासिक ब्याज पर दिलवाए थे। सूदखोर की बहादुरगंज में किराने की दुकान है। सूदखोर ने हर महीने ब्याज चुकाने का वादा भी कराया था। इसके अलावा सतीश ने अपने गांव के एक व्यक्ति से डेढ़ लाख रुपये ब्याज पर लेकर जमीन का एग्रीमेंट कराया था।
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कई बार चुकाए रुपये, कम होने के बजाये बढ़ता गया कर्ज
करीब डेढ़ साल पहले एक लाख रुपये का कर्ज के एवज में सतीश ने कई बार सूदखोर को रुपये दिए। फिर भी उसका कर्ज कम होने का नाम नहीं ले रहा था। सतीश ने दो महीने पहले ही श्याम नारायण के हाथ से दस हजार रुपये रेती निवासी सूदखोर को भेजे थे। पुलिस के मुताबिक, सूदखोर बार-बार उसे आकर रुपये चुकाने के लिए धमका रहे थे। सूदखोर कई बार उसके घर पर भी आए और रुपये अदायगी न करने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी। इसके चलते सतीश काफी ज्यादा अवसाद में था।
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श्याम नारायण से किया था जिक्र, उसने दिया था हौसला
सतीश सूदखोरों की धमकियों से परेशान हो चुका था। उसने सूदखोरों द्वारा प्रताड़ित करने की बात का जिक्र अपने भाई श्यामनारायण से भी किया था। श्याम नारायण ने उसे हौसला दिया था। कहा था कि परेशान मत होना, हम साथ में मिलकर कर्ज को निपटा देंगे।
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कमरे का दरवाजा खोलते ही चीख पड़ी सौम्या, बेसुध हुई मां जगरानी
सतीश की 25 साल पहले मंशा से शादी हुई थी। परिवार में बेटी सौम्या (14) और बेटा शेखर (नौ) थे। सौम्या डॉ. सुदामा प्रसाद विद्यास्थली में कक्षा नौ की छात्रा है जबकि शेखर एनटीआई में कक्षा तीन में पढ़ता है। सुबह घर का माहौल बिलकुल सामान्य था। मंशा देवी ने सुबह जल्दी उठकर पूूजा पाठ के बाद बच्चों को नाश्ता कराकर सुबह साढ़े आठ बजे स्कूल भेज दिया। छमाही परीक्षा देकर डेढ़ घंटे के बाद घर लौटी सौम्या जब वापस आई तो मम्मी-पापा के शव देखकर चीख पड़ी। भागकर अपने ताऊ श्याम नारायण के पास पहुंची। उसने अपनी ताई विमला और चचेरा भाई आशुतोष को बताया। भाई श्याम नारायण के साथ रहने वाली बुजुर्ग मां जगरानी बेटे-बहू का शव देखकर बेसुध हो गई। पुलिस के बाद फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर जांच की।
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कॉल डिटेल से खुलेगा राज
पुलिस ने सतीश और उनकी पत्नी मंशा देवी का फोन भी अपने कब्जे में लिया है। माना जा रहा है कि उससे स्पष्ट होगा कि सुबह किससे बात हुई थी। पुलिस के सामने दो सूदखोरों के नाम सामने आए हैं। उनकी तलाश भी शुरू कर दी गई है।
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बेसहारा हुए बेटा-बेटी, रो-रोकर बुरा हाल
सतीश की मौत के बाद सबसे बड़ा वज्रपात बेटी सौम्या और बेटे शेखर पर टूटा है। माता-पिता का शव देखकर दोनों दहाड़े मारकर रो पड़े। उनकी ताई विमला, चाचा योगेंद्र व श्याम नारायण ने उन्हें संभाला। चचेरे भाई सर्वेश भी भाई व भाभी का शव देखकर बिलख पड़ा। संवाद

सतीश चंद्र। फाइल फोटो- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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